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डीएनपी के आदेश पर स्थगन, 72 गांवों को मिलेगी राहत, पढ़िए पूरी खबर

-बाड़मेर व जैसलमेर के डीएनपी क्षेत्र के लोगों को मिलेगा लाभ, 2011 के वनविभाग के मुख्य प्रतिपालक के आदेश पर स्टे  

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Dnp area barmer jaisalmer

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बाड़मेर. बाड़मेर-जैसलमेर के डीएनपी (राष्ट्रीय मरू उद्यान) क्षेत्र के 72 गांवों को उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य प्रतिपालक वनविभाग की ओर से वर्ष 2011 में लगाए गए तमाम प्रतिबंधों को रिट याचिका के अंतिम निस्तारण तक स्थगन लगाया है। इससे राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के तहत प्रदत्त सभी अधिकारों का लाभ काश्तकारों को मिलेगा।

वर्ष 2011 में मुख्य प्रतिपालक वनविभाग ने जिले के मरूउद्यान क्षेत्र को लेकर आदेश जारी किया था कि यहां पर उत्तराधिकार के अलावा जमीन का बेचान नहीं हो पाएगा। साथ ही बिजली और पानी के कनेक्शन लेने, विकास कार्य करवाने, निर्माण कार्य सहित विभिन्न प्रतिबंध लगाए थे। प्रतिबंधों को लेकर बाड़मेर व जैसलमेर ? के 72 गांवों के लोग परेशान हो गए। इस मामले में राज्य सरकार को भी गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। क्षेत्र के किसानों की ओर से उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई। इसकी सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जारी एक आदेश में मुख्य प्रतिपालक वनविभाग के आदेश के 2011 के प्रभावी क्रियान्वयन पर स्थगन लगाया है। उच्च न्यायालय में किसानों की रिट याचिका को लेकर एडवोकेट महेन्द्र सिंघल एवं त्रिभुवनसिंह चाडी ने पैरवी की।

क्या है मरूउद्यान
बाड़मेर-जैसलमेर जिले में लाखों बीघा जमीन में मरू उद्यान क्षेत्र घोषित किया गया है। यहां पर मरूस्थल के वन्य प्राणियों के संरक्षण के उद्देश्य से यह क्षेत्र संरक्षित है। यहां पर करीब 72 गांवों का आबादी क्षेत्र भी है। आबादी में रह रहे इन लोगों के खेत भी है। 2011 में वनविभाग ने आदेश जारी कर आबादी क्षेत्र में रह रहे लोगों पर प्रतिबंध लगा दिए थे।

रुका हुआ है विकास
मरू उद्यान क्षेत्र में 2011 में लगे प्रतिबंध के बाद विकास कार्य रोक दिए गए। जमीन का बेचान भी नहीं हो पा रहा है। साथ ही सड़क, बिजली, पानी, मनरेगा सहित कई कार्याें को लेकर सालों तक लोग परेशान रहे। इसके बाद राज्य सरकार ने कुछ मामलों में राहत दी थी।

पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
पत्रिका की ओर से राष्ट्रीय मरूउद्यान को लेकर लगे प्रतिबंध और लोगों की समस्याओं को लेकर समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसके बाद एडवोकेट स्वरूपसिंह के नेतृत्व में मरू उद्यान संघर्ष समिति गठित की गई। इसमें क्षेत्र के प्रत्येक गांव से 11 सदस्य शामिल किए गए। बाद में किसानों ने रिट याचिका दायर की गई। चुनावों में भी मरू उद्यान की समस्या मुख्य मुद्दा रहा। मरूउद्यान की समस्या को लेकर केन्द्रीय टीम ने भी जायजा लेकर रिपोर्ट दी थी।