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कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस खोलना हुआ आसान

सरकार दे रही किसानों को सस्ता ऋण

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कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस खोलना हुआ आसान

कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस खोलना हुआ आसान

बाड़मेर. खेती से जुड़ी ढांचागत सुविधाओं के लिए किसानों के साहुकारों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। केन्द्र की महत्ती योजना के तहत किसान ऋण लेकर अपना कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स, वेयरहाउस, पैकेजिंग यूनिट शुरू कर सकते हैं। केन्द्र सरकार ने इसके लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड यानि कृषि अवसरंचना निधि की शुरूआत की गई है जिसमें अलग-अलग परियोजना के हिसाब से मध्यमअवधि और लंबी अवधि का कर्ज मुहैया कराया जाएगा।

इसमें प्रतिवर्ष 3 फीसदी ब्याज में छूट तथा तथा दो करोड़ तक कर्ज के लिए सीजीटीएमएसई स्कीम के तहत लोन गारंटी कवरेज भी मिलेगा। योजना के तहत कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, कलेक्शन सेंटर और प्रोसेसिंग यूनिट, परख केंद्र, ग्रेडिंग, पैकेजिंग यूनिट, ई-प्लेटफॉर्म जैसी इकाइयों के निर्माण के लिए ऋण प्राप्त किया जा सकता है।

योजना का मूल उद्देश्य किसानों के लिए खेती से जुड़े ढांचे का विकास करना। एग्रो इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत नाबार्ड की ओर से कोआपरेटिव बैंक के माध्यम से गांवों को मार्केटिंग हब के रूप में मजबूत करने और उनके बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बहुत कम ब्याज दरों पर ऋण सहायता प्रदान की जाएगी।

बाड़मेर में चार योजनाओं के तहत मिला ऋण- जिले में इस योजना के तहत अब तक 1 वेयर हाउस एवं 3प्राथमिक प्रोसेसिंग यूनिट के लिए 5.23 करोड़ रूपए का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया जा चुका है।

जानिए कैसे मिलेगा फंड- प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठन और कृषि उद्यमी समेत बैंक और वित्तीय संस्थाओं, प्राथमिक कृषि कर्ज सोसाइटियों, किसानों, मार्केटिंग सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों , स्वयं सहायता समूहों, संयुक्त जवाबदेही समूह , बहुउद्देशीय सहकारी समितियों, कृषि से जुड़े और केन्द्रीय/राज्य एजेंसियों, सार्वजनिक-निजी साझेदारी परियोजना प्रायोजित, स्थानीय निकायों को एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत वित्त पोषण मुहैया कराया जाएगा। इस फंड की मॉनिटरिंग एक ऑनलाइन मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम के जरिए की जाएगी। इस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ही फंड के लिए आवेदन किया जा सकेगा। फंड की अवधि 2021-22 से 2022-23 तक 10 वर्ष से बढ़ाकर 13 वर्ष कर दी गई है।

बाड़मेर में जीरे, ईसबगोल का उत्पादन क्षेत्र बढ़ा है। इसलिए किसान इस क्षेत्र में भंडारण एवं प्राथमिक प्रसंस्करण की इकाइयां आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत स्थापित करें। सरकार की ओर दिए जाने वाले ऋण से उक्त कार्य आसानी से हो सकता है।- डॉ. दिनेश प्रजापत, जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड बाड़मेर