28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

​Education Department Rajasthan: पैदल नहीं अब साइकिल चला स्कूल पहुंचेंगी 7. 5 लाख बालिकाएं

Education Department Rajasthan:पिछले सत्र की 3.50 लाख व इस सत्र की 4 लाख बेटियों को साइकिल का इंतजार

2 min read
Google source verification
​Education Department Rajasthan:

फाइल फोटो

दिलीप दवे बाड़मेर. पिछले दो शिक्षा सत्रों से ठंडे बस्ते में पड़ी निशुल्क साइकिल वितरण योजना में अचानक सक्रियता आ गई है। सरकार के निर्देश पर शिक्षा विभाग विधानसभा चुनावों की आचार संहिता लागू होने से पहले साइकिल खरीद की प्रक्रिया पूरी कर वितरण की तैयारी में जुट गया है। पिछले सत्र 2022-23 तथा मौजूदा सत्र 2023-24 में कक्षा 9 में प्रवेशित करीब 7.50 लाख छात्राओं को निशुल्क साइकिलों का वितरण किया जाना है।
माध्यमिक शिक्षा के वित्तीय सलाहकार ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अति आवश्यक पत्र भेज जिले में ब्लॉक तथा नोडल विद्यालयवार साइकिलों की डिमांड मांगी है। विभाग ने साइकिल निर्माता कंपनियों से ई निविदाएं आमंत्रित कर ली है। विभाग उनसे शीघ्र साइकिलों की आपूर्ति लेने की तैयारी है जिससे विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले छात्राओं को साइकिलों का वितरण किया जा सके। गौरतलब है कि बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली कक्षा 9 में नव प्रवेशित छात्राओं को निशुल्क साइकिल दी जाती हैं।

यह भी पढ़ें: शिक्षकों पर स्कूली की रसाई का चल रहा कर्ज, लाखों बकाया

संख्या मिलते ही फर्म को जारी होंगे आदेश
अब सरकार ने पिछले और इस सत्र की करीब साढ़े सात लाख बालिकाओं को साइकिलों के वितरण का फैसला लिया है। इसके लिए फर्मों से ई निविदाएं ले ली गई हैं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से जिले में वितरित की जाने वाली साइकिलों की संख्या विभागीय मेल पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। जैसे ही स्कूलों से कक्षा 9 में प्रवेशित छात्राओं की संख्या मिलेगी, साइकिल निर्माता कंपनियों को उसके अनुसार आपूर्ति के आदेश देने की तैयारी चल रही है।

यह भी पढ़ें: दांतों के दर्द से कराह रहे ग्रामीण, चिकित्सा विभाग ने रोक दी भर्ती, कैसे मिलेगा इलाज

पिछले सत्र में वाउचर मिला ना साइकिल
पिछले सत्र की करीब 3.5 लाख छात्राओं को साइकिलों के वितरण की बजाय ई वाउचर देने का सरकार ने फैसला किया था, लेकिन वो सिरे नहीं चढ़ पाया। ऐसे में छात्राओं को न तो साइकिलें मिली और न ही ई वाउचर मिल पाया।

यह भी पढ़ें: सरकारी स्कूलों में ना पढ़ाने वाला ना ही पानी पिलाने वाला

अतिशीघ्र मिले
प्रति वर्ष सत्र की शुरुआत में मिलनी चाहिए साइकिलें जिससे हि दूर से स्कूल वाली बेटियों उसका सदुपयोग करके स्कूल पहुंच सके। यदि टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सके तो छात्राओं के खाते में साइकिल के बदले नकद राशि का भुगतान भी किया जा सकता है। - बसन्त कुमार जाणी, जिलाध्यक्ष, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा बाड़मेर