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स्कूल तो क्रमोन्नत हो गए पर पढ़ाने वाले लगाए ही नहीं

- व्याख्याता पद नहीं और बारहवीं की परीक्षा देने का इम्तिहान अगले माह - कहीं पर एक तो कहीं दो शिक्षकों के भरोसे 12 कक्षाएं

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दिलीप दवे बाड़मेर. एक महीने बाद यानि अगले माह 9 मार्च से 12वीं व 16 मार्च से दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने जा रही है। वहीं प्रदेश की स्कूलों में पदरिक्तता के कारण शिक्षण व्यवस्था बेपटरी चल रही है। एक तरफ पिछले वर्ष माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत हुए 3832 स्कूलों में एक वर्ष बाद भी व्याख्याताओं के पद तक स्वीकृत नहीं किए गए है। जिसके कारण इन विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब दो लाख से अधिक विद्यार्थी बिना व्याख्याताओं के बोर्ड परीक्षा देने के लिए मजबूर होंगे। तो दूसरी तरफ पिछले दो सत्र से वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता पदों की पदोन्नति नहीं होने के कारण पहले से स्वीकृत पदों में भी अधिकांश पद रिक्त चल रहे हैं। ऊपर से तबादलों के कारण हुई पदरिक्तता ने कोढ़ में खाज का काम किया है।

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सरकार ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों को क्रमोन्नत तो किया है, लेकिन क्रमोन्नत स्कूलों में पद स्वीकृत नहीं होने व समयबद्ध डीपीसी व सीधी भर्ती प्रक्रिया नहीं होने के कारण शिक्षकों का अभाव चल रहा है। ऐसे में क्रमोन्नत स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भविष्य चौपट होता नजर आ रहा है। यह िस्थति पूरे प्रदेश में है। गौरतलब है कि बारहवीं कक्षाओं में व्याख्याताओं की नियुक्ति शिक्षण व्यवस्था के लिए होती है लेकिन नवक्रमोन्नत में पद ही स्वीकृत नहीं है तो फिर नियुक्ति कैसे होगी। वहीं, पहले से संचालित उमावि में भी व्याख्याताओं के काफी पद खाली है। इस पर दसवीं व बारहवीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बिना विशेषज्ञों के पढ़ाई कर परीक्षा देने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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कई विद्यालयों में यहीं िस्थति- जिले का उदाहरण दे तो राउमावि बांकाणा तला, ब्लॉक चौहटन में साढ़े तीन सौ का नामांकन है और पढ़ाने वाले शिक्षक तृतीय श्रेणी के दो व वरिष्ठ अध्यापक तीन ही है। राउमावि कड़वासरो की ढाणी,ब्लॉक बाड़मेर में 224 विद्यार्थियों को दो वरिष्ठ अध्यापक व दो तृतीय श्रेणी शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। कमोबेश यही िस्थति राउमावि धोली नाड़ी,ब्लॉक गुड़ामालानी, राउमावि बोली, ब्लॉक फागलिया, राउमावि ख़बडाला, ब्लॉक गडरारोड, राउमावि भैरूड़ी , ब्लॉक सेड़वा की है, जहां पद रिक्तता की िस्थति और अधिक नामांकन पर शिक्षण व्यवस्था बेपटरी नजर आती है।व्याख्याताओं के पद हो स्वीकृत-अतिशीघ्र इन क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याताओं के पद स्वीकृत किए जाने चाहिए। साथ ही पिछले दो सत्रों से वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता डीपीसी भी बकाया चल रही है। यदि समय पर दो सत्रों की डीपीसी की जाती है तो क्रमोन्नत विद्यालयों के विद्यार्थियों को व्याख्याता मिलने से इनकी पढ़ाई सुचारू हो सकेगी।-- बसन्त कुमार जाणी, जिलाध्यक्ष, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा