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…यह, है असली मजबूरी….. जिंदगी हर कदम एक नई जंग है…..

जिंदगी हर कदम एक नई जंग है.....

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Every step of life is a new war .....

Every step of life is a new war .....

- ओम माली

संतुलन- ये एक गरीब बालिका के पांव है जो रस्सी पर चल रहे है। रस्सी जमीन से बीस फीट ऊंची है। गिरने का खतरा है लेकिन सीख दे रहे है कि जीवन में रास्ता और मुश्किलें कैसी भी हों संतुलित होकर आगे बढ़े तो डांवाडोल नहीं हो सकते।

अभ्यास- यह वही बालिका है। पांव रस्सी पर और एक हाथ में बांस। सीख दे रही है कि करत-करत अभ्यास से जड़मति होत सुजान। यह दस साल की बालिका बता रही है कि उसने कितना अभ्यास किया होगा। कितनी बार गिरी, कितनी चोटें खाई लेकिन आज वह इसी रस्सी पर यों चलकर तालियां बटोर रही है।

एकाग्रता- रस्सी पर साइकिल का पहिया और उसमें पांव को आगे बढ़ाते चलना। यह उस एकाग्रता का परिणाम है जिसमें उसका ध्यान केवल अपने पर है। इतनी एकाग्रता अपने कर्म के प्रति करने की सीख देती यह बालिका बता रही है कि काम कोई भी मुश्किल नहीं,बस ध्यान जरूरी है।

...यह, है असली मजबूरी.....इतनी निपुणता के बाद जब यह बालिका रस्सी से उतरी और हाथ फैलाने लगी तो पता चला कि असल में पेट की आग ही है जो इतना मजबूर कर रही है। जिस कलाकार को एकटक देखकर लोग दाद दे रहे थे वह हाथ फैलाकर एेसे सामने आई तो लोगों की आंखें भी नम हुई...कहने लगे लोग...मजबूरी क्या नहीं करवाती।