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फिटनेस सेंटर संचालक पर महकमा मेहरबान, कार्मिकों को बनाया आरोपी! जानिए पूरी खबर

- पत्रिका ने मामला किया उजगार तो सदर पुलिस में मामला दर्ज, जांच में खुलेगी विभाग के कार्मिकों की करतूत  

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Fake fitness certificate case

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बाड़मेर. प्रादेशिक परिवहन अधिकारी के अधिकृत गणपति फिटनेस सेंटर की सरकारी आइडी से ऑनलाइन आवेदन कर जिला परिवहन अधिकारी की जाली मुहर व हस्ताक्षर से बड़े स्तर पर वाहनों की बिना किसी जांच के फर्जी फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी करने के मामले में परिवहन महकमा सेंटर संचालक व अन्य कार्मिकों पर मेहरबान नजर आ रहा है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका के 24 जनवरी के अंक में प्रकाशित समाचार 'गड़बड़झाला: वाहनों के फिटनेस केन्द्र पर ताला, फिर भी 350 वाहनों के जारी हो गए प्रमाण पत्र' में फर्जीवाड़ा उजागर किया गया था। खबर का प्रकाशन होते ही हरकत में आए परिवहन विभाग ने दो जनों के खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया है। जबकि जिम्मेदारों पर मेहरबान है। ज्ञात रहे कि दो साल पहले गणपति फिटनेस सेंटर में अनियमितताओं के चलते विभाग ने एक बार बंद किया था।

संचालक पर मेहरबान, कार्मिक को बनाया निशाना
पुलिस के अनुसार परिवहन विभाग के कनिष्ठ सहायक भगवानसिंह ने रिपोर्ट पेश कर बताया कि प्रादेशिक परिवहन अधिकारी जोधपुर द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत गणपति फिटनेस सेंटर बाड़मेर पर हाईकोर्ट की रोक के बाद से बंद है। इसके बावजूद सेंटर संचालक के निजी कार्मिक गणपत गौड़ पुत्र परमसुख निवासी छीतर का पार व विशनलाल निवासी बाटाडू ने षड्यंत्रपूर्वक फर्जी तरीके से दस्तावेज व डीटीओ की फर्जी रबर मुहर बनवा कर ऑनलाइन ओटीपी प्राप्त कर वाहनों के फर्जी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच खुलेगा में राज?
पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया है। जांच के बाद स्पष्ट होगा कि यह फिटनेस प्रमाण पत्र कैसे जारी हुए? गणपति सेंटर की आइडी से ऑनलाइन आवेदन होने के बाद परिवहन विभाग की आइडी पर आवेदन की जानकारी आती है। साथ ही प्रतिदिन की रिपोर्ट गणना में फिटनेस प्रमाण की संख्या भी जाती है। यह भी जांच का विषय है। हालांकि पुलिस जांच में राज खुलेगा।
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सवाल मांग रहे जबाव
- नवंबर में गणपति सेंटर को बंद किया, डीटीओ ने आइडी को क्यों नहीं किया ब्लॉक?
- 3 माह में 350 से अधिक वाहनों के जारी हो गए फिटनेस प्रमाण पत्र, डीटीओ ने क्यों नहीं दिया ध्यान?
- आइडी व ओटीपी देने की जिम्मेदारी संचालक की होती है, कार्मिकों को क्यों बनाया आरोपी?
- मामला पता चलने के बाद भी क्यों रिपोर्ट दर्ज करवाने में बरती देरी?
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जांच में खुलेगा गड़बड़झाले का राज
पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में स्पष्ट होगा कि किसकी लापरवाही रही है? परिवहन विभाग के अधिकारियों की क्या लापरवाही रही, यह जांच में ही स्पष्ट होगा।- मूलाराम चौधरी, थानाधिकारी सदर