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भागवत भगवान का रूप, श्रवण करने से दु:ख होते दूर

- जसाेल में श्रीमद् भागवत कथा का वाचन

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बालोतरा. भागवत भगवान का रूप है। इसका श्रवण करने मात्र से सब दु:ख दूर हो जाते हैं। इस पर इसका श्रवण जरूर करें। गोसेवा हितार्थ जसोल के तालाब रोड पर आयोजित श्रीमद भागवत कथा का वाचन करते हुए कथा वाचक साहिबादास ने यह बात कही। कथा श्रवण करने के लिए आसपास के गांवों से अ धिक संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
उन्होंने कहा कि भगवान को भक्त से बढ़कर ओर कुछ भी प्रिय नहीं होता है। सच्चे मन से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। वे भक्तों के अधीन होते हैं। उनकी पुकार सुन मदद के लिए दौड़ पहुंचते हैं। इस पर समय निकालकर सदैव ईश्वर नाम का स्मरण करें। कहा कि संसार में गुरू पद सबसे बड़ा होता है। भगवान के भी गुरू होते हैं। इस पर जीवन में गुरू जरूर बनाएं। सदैव गुरू के बताए कार्य को करें। उनकी आज्ञा का पालन करके ही भव सागर को पार किया जा सकता है। इस पर सदैव गुरू का मान सम्मान करें। कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय का बड़ा ही महत्व है।जिस घर में गाय रहती है। उस घर में सदैव सुख व समृद्धि आती है। कष्ट स्वयं नष्ट हो जाते हैं। इस पर गाय को जरूर पालें। ऐसा करके ही गाय का संरक्षण किया जा सकता है। स्थान अभाव, कार्य को लेकर जो गाय को पाल नहीं सकते। वे समीप की गोशाला में जाकर उनकी सेवा करें। गो सेवा करने से अनंत फल की प्रा प्ति होती है। मौजूद श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य किया। जयकारे लगाए। मोहनमाली, देवेन्द्र माली ने भागवत की आरती उतारी। प्रसाद चढ़ा इसे श्रद्धालुओं को वितरित किया। इस अवसर पर मुकनाराम माली, रामेश्वर भूतड़ा, हुकमाराम माली, भैराराम, प्रहलाद माहेश्वरी सहित सैकड़ों जने मौजूद थे।

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