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पंजाब में मालवा फतेह करने के लिए किलेबंदी

- 79 सीट जुड़ी है मालवा क्षेत्र से- 2017 में आम आदमी ने मालवा में दिया था झटका- जट सिख राजनीति का गढ़ है मालवा

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पंजाब में मालवा फतेह करने के लिए किलेबंदी

पंजाब में मालवा फतेह करने के लिए किलेबंदी


रतन दवे
चण्डीगढ़.
पंजाब की राजनीति का गढ़ मालवा को फतेेह कर लिया तो मानो पंजाब को जीत लिया। इसकी किलेबंदी सभी ने शुरू कर दी है। चन्नी सरकार, आम आदमी और कैप्टन अमरिंदर तीनों ही इस बार के चुनाव को करो या मरो के हालात में इस क्षेत्र पर जोर देंगे। मालवा में 79 सीट आती है और यहां 2017 में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को टक्कर दी थी।
पंजाब तीन क्षेत्र में बंटा है मालवा, माझा और दोआब। मालवा में 79, माझा में 25 और 13 सीट आती है। कांग्रेस ने पहली बार मालवा की जगह दोआब से मुख्यमंत्री बना लिया है लेकिन कांग्रेस के लिए पक्ष की बात मालवा पर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू की पकड़ मानी जा रही है। सिद्धू यहां के दस प्रतिशत सीटों पर वजूद रखते है। मालवा और दोआब दोनों की करीब 50 सीट है जो सिद्धू के प्रभाव की मानी जाती है। कांग्रेस मालवा को सिद्धू के भरोसे है। इधर केप्टन अमरिंदरसिंह भी मालवा की सीटों पर ही अपना दबदबा कायम रखे हुए थे, अब कांग्रेस से अलग होने के बाद भी उम्मीद लिए हुए है।
मालवा में कांग्रेस का ये गणित
मालवा से इस बार कांग्रेस ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया तो चन्नी सरकार में मंत्री व उप मुख्यमंत्री मालवा को दे दिए। इसमें चार बड़े नेता सरकार में है। उप मुख्यमंत्री सुखजिदर रंधावा,ओ पी सोनी के अलाव सुख सरकारिया शामिल किए गए है।
केजरीवाल की मालवा में किलेबंदी
2017 के चुनावों में आम आदमी पार्टी को अधिकांश सीट मालवा से ही आई। मालवा को लेकर आम आदमी फिर से किलेबंदी में जुट गई है और केजरीवाल इस क्षेत्र का दौरा कर मुफ्त बिजली सहित कई घोषणाओं की बात कर आए है। मालवा में पंजाब से केजरीवाल या उनकी पत्नी को चुनाव लड़ाने की मांग भी हुई है। आम आदमी पार्टी में सुगबुगाहट है कि यदि खुद केजरीवाल या उनकी पत्नी चुनाव में पंजाब आ गए तो फिर कांग्रेस को कड़ी टक्कर मिल जाएगी। फिरोजपुर,फरीदकोट,अबोहर, फजलका और भटिण्डा में आम आदमी काफी प्रभाव में रही है।
अकाली के लिए अब संकट
मालवा के अबोहर, लुधियाना देहात और कई इलाकों में अकाली भाजपा के साथ रहकर मजबूत रहे लेकिन अब अकाली के लिए यहां पहली मुश्किल आम आदमी पार्टी ने वोट तोड़कर कर दी है।
दोआब में गूंज रहा साडा चन्नी..चंगा चन्नी
दोआब की 13 सीट पर दलित सिख है। कांग्रेस ने चरणजीतसिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर यहां एक नारा दे दिया है साडा चन्नी..चंगा चन्नी और चन्नी सरकार-चंगी सरकार। बिरादरी और इलाके दोनों के लिए लिहाज से दोआब अब कांग्रेस के लिए मजबूत बन रहा है। यहां अकाली दल का दखल रहा था जो अब कम है। इधर आम आदमी यहां दलित वर्ग के वोट को लेकर सेंध की स्थिति लाने वाली थी लेकिन अब दाल गलती नजर नहीं आ रही है। दोआब के जलंधर में परगटसिंह, अमृतसर में नवजोत सिद्धू जुड़े है और होशियारपुर इलाके में कांगेस को जोर लगाना पड़ रहा है।
माझा
गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर से जुड़ा कांग्रेस के लिए मालवा और माझा दोनों ही इलाके अब सिद्धू के भरोसे हो गए है। मालवा में दस प्रतिशत और माझा में अधिकतम जट सिख होने से सिद्धू का ही असर है। कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू को यहां की कमान और दोआब की कमान इस बार मुख्यमंत्री चरणजीतसिंह चन्नी के पास है। आम आदमी भी माझा के अंदर दखल की स्थिति में है।

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