
बाड़मेर. शिव रसोई घरों, होटलों व ढाबों से प्याज व लहसून का तडक़ा गायब सा हो गया है। पिछले कुछ समय से बारिश के कारण उत्पादक राज्यों में इनकी फसल खराब होने से कीमतें आसमान पर है।
बढ़ती कीमतों से आमजन इनकी खरीद से दूरी बना रहा है। भोजन की थाली में प्याज के सलाद की जगह खीरा, ककड़ी ही परोसी जा रही है। लगातार बढ़ रही कीमतों ने लोगों के घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
गांव, ढाणियों में किसान व पशुपालक अपने दोपहर के भोजन में बाजरे की रोटी के साथ प्याज व लहसून की चटनी से काम चलाते थे, लेकिन पिछले दो-तीन माह से इनके दामों में बढ़ोतरी होने पर अब मिर्ची की चटनी व छाछ से कम चल रहा है।
यह हैं दाम
इस वर्ष की शुरुआत में 8.10 रुपए किलो में बिकने वाले प्याज अब रिटेल में 50 से 70 रुपए में बिक रहे हैं। ऐसे में प्याज खरीदना आम आदमी के बूते से बाहर हो गया है। वहीं तीन माह पूर्व 70 से 80 रुपए प्रति किग्रा बिकने वाले लहसून के थोक भाव 180 से 200 रुपए तक पहुंच गए हैं। 50 किग्रा प्याज का कट्टा खरीदने वाले लोग अब एक किग्रा प्याज खरीदने पर आ गए हैं।
बारिश से फसल खराब, कीमतों पर प्रभाव-
प्याज व लहसून के हॉलसेल व्यापारी बताते हैं कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान में इस बार बारिश से प्याज व लहसून की फसल खराब होने पर कीमतें यकायक बढ़ गई हैं।
महाराष्ट्र से भी आवक नहीं हो रही है। ढाबा संचालक इंद्रसिंह का कहना है कि अब ग्राहकों को प्याज की जगह सलाद में खीरा, ककड़ी परोसी जा रही है।
गृहणियों के अनुसार सब्जी तड़का प्याज व लहसून के बिना नहीं लग सकता है,जिससे सब्जी के स्वाद पर भी असर पड़ रहा है। सब्जी के स्वाद को बरकरार रखने के लिए मंहगे दामों से प्याज व लहसून खरीदना पड़ रहा है, जिससे रसोई का बजट भी गड़बड़ा गया है।
Published on:
21 Nov 2019 12:37 pm

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