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लड़कियां कम होने लगीं तो कन्या-कलश में हो रही शादी

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Girls start getting less then marriage in girl and kalash

Girls start getting less then marriage in girl and kalash

सामाजिक बदलाव : अब बाहरी प्रदेशों से ला रहे हैं दुल्हनें
लड़कियां कम होने लगीं तो कन्या-कलश में हो रही शादी
बाड़मेर. क्षेत्र में लड़कियों की घटी संख्या से अब दूल्हों के लिए दुल्हन का संकट खड़ा हो गया है। एक और जहां लड़कियों का कम होना चिंता का विषय है तो दूसरी ओर समाज में सकारात्मक सुधार दिखने लगा है। दहेज की मांग करने वालों के हाल ये हैं कि वे अब कंकू और कन्या (बिना दहेज) शादी को राजी हैं। बेटी के पिता के घर बेटे वाले चक्कर काट रहे हैं। कई समाज में तो लड़कियां इतनी कम हो गई हैं कि जाति बंधन को छोड़कर अब बाहरी प्रदेश से दुल्हनें दाम चुकाकर लाई जाने लगी हैं। 2011 तक की जनगणना में बाड़मेर जिले में 1000 बेटों पर 889 बेटियां ही थीं। कम बेटियों के कारण दस साल से शादी को लेकर समस्याएं आने लगी हैं। लड़कियां नहीं मिलने पर दुल्हन के लिए दहेज की मांग छोडऩी पड़ रही है।
क्या-क्या बदलाव
25 से 30 साल पहुंची लड़कों के विवाह की औसत उम्र
उड़ीसा, बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व गुजरात से लाई जाने लगी हैं दुल्हनें
सामाजिक और जातिबंधन छोड़ किए जा रहे हैं बाहरी प्रदेशों में रिश्ते
लड़कियों की समाज में कद्र बढ़ी, आसान हुए रिश्ते
पारिवारिक ङ्क्षहसा और दहेज प्रताडऩा के मामले कम हुए।
बहिष्कृत कर देते थे
&समाज और जाति के इतर रिश्ता होने पर पहले बात का बतंगड़ बन जाता और सामाजिक पंचायती होती
थी। सामाजिक बहिष्कार के निर्णय भी होते थे। समाज
में लड़कियों की संख्या घटने पर अब यह स्थिति नहीं है।
कई समाजों में अब बाहरी प्रदेशों से दुल्हनें लाई जा
रही हैं।
महेश पनपालिया, सामाजिक कार्यकर्ता
बड़ा सामाजिक बदलाव
&लड़कियों की संख्या कम होने पर अब शादी संबंध करना मुश्किल होने लगा है। जाहिर है जब दुल्हन मिलना ही मुश्किल हो तो फिर उसके लिए अन्य मांग कैसे की जा सकती है? समाज में इस कारण दहेज प्रथा कम हुई है। दूसरा कारण कई समाज में जागरूकता भी आई है। युवा
खुद दहेज को लेकर इनकार करने लगे हैं।
नवनीत पचौरी, समाजशास्त्री

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