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क्रमोन्नत कर कार्मिक देना ही भूल गई सरकार?

- नगरपरिषद में एक चौथाई से अधिक पद रिक्त, आमजन परेशान - आमजन को सामान्य कार्य के लिए काटने पड़ रहे कई चक्कर- पांच साल से कार्मिकों की कमी झेल रही नगरपरिषद

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क्रमोन्नत कर कार्मिक देना ही भूल गई सरकार?

क्रमोन्नत कर कार्मिक देना ही भूल गई सरकार?

बालोतरा.

तत्कालीन प्रदेश सरकार के पांच वर्ष पूर्व नगरपालिका को नगर परिषद में क्रमोन्नत करने पर आमजन ने अच्छे कामकाज व शहर के विकास को लेकर कई सपने संजोए थे, लेकिन पद रिक्तता के चलते आमजन को आज भी पहले की तरह परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। स्वीकृत पदों से एक चौथाई से अधिक पद रिक्त होने पर सामान्य कार्य के लिए लोगों को कई चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, कार्यरत कार्मिक काम के बोझ तले दबे हुए हंै।राज्य सरकार ने अप्रेल 2013 को नगर पालिका बालोतरा को नगर परिषद में क्रमोन्नत किया था। इसके बाद सरकार ने यहां पदों की स्वीकृति तो जारी की्र, लेकिन नियुक्ति नहीं हुई। एेसे में पद रिक्तता की समस्या पांच साल से चल रही है। वर्तमान में अभियंताओं के पद रिक्त होने पर विकास के कार्य समय पर शुरू नहीं होते। देखरेख अभाव में कार्य गुणवत्तापूर्ण भी नहीं होते हैं।

एक चौथाई से अधिक पद रिक्त- नगर परिषद में जितने पद स्वीकृत कर रखें हैं, उनमें से चौथाई से अधिक पद रिक्त है। जानकारी अनुसार सचिव, कर निर्धारक, लेखाधिकारी, सहायक लेखाधिकारी, कार्यालय अधीक्षक, वरिष्ठ लिपिक कैशियर, राजस्व निरीक्षक का एक-एक पद स्वीकृत है, जो रिक्त चल रहे हैं। वरिष्ठ लिपिक स्वीकृत पांच में से तीन,कनिष्ठ लिपिक पन्द्रह में से दो, स्वच्छता निरीक्षक प्रथम दोनो, निरीक्षक द्वितीय का एक,अधिशासी अभियंता का एक, सहायक अभियंता स्वीकृत दो में से एक, कनिष्ठ अभियंता स्वीकृत सिविल पांच में से तीन, कनिष्ठ अभियंता विद्युत स्वीकृत का एक, सफाई कर्मचारी स्वीकृत 339 में से 98 लम्बे समय से खाली है। नगरपरिषद में स्वीकृत 509 पदों में से 323 पद भरे हुए हैं। 186 पद रिक्त है।

पद रिक्तता से कार्य प्रभावित-
नगर परिषद में सामान्य व प्रमुख पद बड़ी संख्या में रिक्त है। इससे कार्य प्रभावित हो रहा है। प्रदेश सरकार ने कई बार रिक्त पद भरने की मांग की, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। - रतनलाल खत्री, सभापति बालोतरा