
Barmer
जिले में किडनी के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। इन रोगियों के लिए डायलिसिस करवाना जरूरी हो जाता है। डायलिसिस भी हफ्ते में एक या दो बार करवानी होती है। बाड़मेर जिले में कहीं पर भी सुविधा नहीं होने पर मरीज को लेकर परिजनों को जोधपुर जाना पड़ता है। किडनी ट्रांसप्लांट होने तक डायलिसिस करवाना जरूरी हो जाता है।
एेसे में मरीज सहित परिजनों के लिए यह समस्या गंभीर होती जा रही है। डायलिसिस की सुविधा के लिए बाड़मेर जिला मुख्यालय के अस्पताल के लिए पूर्व में तत्कालीन सांसद हरीश चौधरी ने दो युनिट के लिए सांसद कोष से राशि दे दी थी। यहां कार्य कर रही विभिन्न कंपनियों ने मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही तत्कालीन राज्य सरकार के चिकित्सा मंत्री ने भी इसके लिए स्वीकृति दे दी थी
लेकिन अस्पताल प्रबंधन इस बात को लेकर कन्नी काट गया कि यहां डायलिसिस की सुविधा शुरू हुई तो कौन चिकित्सक यह कार्य करेगा और सेवाएं देने के लिए हर वक्त दो नर्सिंगकर्मियों की जरूरत रहेगी। इसलिए किसी को प्रशिक्षण के लिए भेजा ही नहीं गया। लिहाजा डायलिसिस की सुविधा बाड़मेर को नहीं मिल पाई और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
अब केन्द्र सरकार की घोषणा
केन्द्र सरकार ने करीब एक साल पहले और राज्य सरकार ने अपने बजट भाषण में यह घोषणा की थी कि हर जिला मुख्यालय पर डायलिसिस मशीन लगाई जाएगी लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इस कारण डायलिसिस सुविधा नहीं मिल रही है।
जिले में बढ़ रहे मरीज
किडनी के मरीज जिले में बढ़ रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज जोधपुर पहुंच रहे हैं। यहां पर आने जाने के लिए निजी वाहन करना पड़ता है। इसके बाद मरीज के दो परिजनों को साथ में रहना पड़ता है। एक दिन इस प्रक्रिया में लग जाता है। मरीज इतना निढाल हो जाता है कि उसके लिए मुश्किल हो जाती है।
मशीन आएगी तो प्रशिक्षण पर भेज देंगे
डायलिसिस मशीन को लेकर उच्च स्तर का मामला है। अभी प्रक्रिया में बताया जा रहा है। जैसे ही मशीन आएगी कार्मिकों को प्रशिक्षण पर भेजकर सुविधा प्रारंभ करवाएंगे।-
डा. देवेन्द्र भाटिया, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी बाड़मेर
Published on:
15 Dec 2016 01:38 pm
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