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3 सालों से लगातार अच्छी बरसात से लूनी नदी में पानी आया, तटवर्ती क्षेत्रों के कुएं रिचार्ज हो गए, लेकिन बढ़ा रासायनिक पानी

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पाकिस्तान से सटे इस जिले में 8 सालों से हो रही प्रदूषित पानी की आवक, कुएं में भरा; किसान भी हुए प्रभावित

दलपत धतरवाल/बालोतरा (बाड़मेर).
पिछले तीन सालों से लगातार अच्छी बरसात से लूनी नदी में पानी आया और किसानों तटवर्ती क्षेत्रों के कुएं रिचार्ज हो गए। कुओं में पानी आने से किसानों की समस्या भी काफी हद तक मिट गई, लेकिन पाली की वस्त्र धुपाई फैक्ट्रियों से नदी में बहाया जा रहा रासायनिक पानी कुओं के पानी को दूषित कर रहा है।

इससे क्षेत्र के कई गांवों में सैकड़ों कुओं का पानी प्रदूषित हो गया है। यह पानी न तो पीने के लायक बचा और ना ही इसका खेती में उपयोग किया जा सकता है।

पाली से करीब १०० किमी. दूर जिले के गांवों तक प्रदूषित पानी बहकर आता है। नेहड़ा बांध में जमा प्रदूषित पानी भी बांडी नदी से धुंधाड़ा गांव में आकर लूनी नदी में शामिल हो जाता है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जामंत्री ने नदी में प्रदूषित पानी के बहाव का अवलोकन किया था। किसानों के अनुसार उसके बाद एक बार बहाव थम गया, लेकिन अब प्रदूषित पानी का बहाव पुन: तेज गया। इससे कुंओं का पानी प्रदूषित हो गया। कुओं में प्रदूषित पानी भर जाने से सिंचाई प्रभावित हो रही है।

प्रदूषित पानी से भूमिगत जलस्तर पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इससे रामपुरा, गोदों का बाड़ा, महेश नगर, पातों का बाड़ा, अजीत, चारणों का बाड़ा, भलरों का बाड़ा, भानावास, सामूजा, ढ़ींढ़स, खरंटिया, मजल, कोटड़ी, लाखेटा, लालिया गांवों के कुएं प्रदूषित हो गए।

आठ सालों से आवक जारी
पाली जिले की औद्योगिक इकाइयों से निस्तारित प्रदूषित पानी की लूनी नदी में पिछले आठ से आवक जारी है। दो साल पहले तक प्रदूषित पानी रामपुरा, गोदों का बाड़ा गांव तक ही आता था। अब प्रदूषित पानी भानावास गांव तक आ रहा है। इससे बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हुए है।

दिया था धरना
करीब ४ माह पहले लूनी नदी में प्रदूषित पानी की आवक से प्रभावित किसानों ने समदड़ी कस्बे में धरना देकर विरोध जताया। इसके बाद सिवाना विधायक हमीरसिंह भायल ने अधिकारियों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। पाली जिले के प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों के साथ नेहड़ा बांध का अवलोकन कर गेट बंद करवाए। पाली जिले की औद्योगिक इकाइयों को भी कुछ दिनों तक बंद करवाया गया।

इसके बाद पानी की आवक थम गई। इस बीच उद्यमियों ने फिर से चोरी-छुपे प्रदूषित पानी को नदी में छोडऩा शुरू कर दिया और रासायनिक पानी फिर से समदड़ी तहसील के गांवों तक पहुंच गया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जामंत्री, प्रदूषण नियंत्रण मंडल चेयरमैन के निर्देशन में एक विशेष टीम ने अवलोकन किया। फिर से पाली के उद्यमियों को सख्ती से इकाइयां बंद रखने के निर्देश दिए गए।

फैक्ट फाइल
८ - सालों से प्रदूषित पानी की आवक
२ - सालों से गंदे पानी में बढ़ोतरी
१५०० के करीब किसान प्रभावित

१५ गांव प्रदूषित पानी की झेल रहे समस्या
१०० किमी है रामपुरा से पाली की दूरी

६० किमी. नेहड़ा बांध की रामपुरा से दूरी
३५० के करीब कुएं प्रदूषित पानी से खराब
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