
म्है राजस्थानी माय शपथ लेणी चावंंू...
बाड़मेर.
राजस्थान की 16 वीं विधानसभा में कई सदस्य राजस्थानी भाषा में शपथ लेने की बड़ी इच्छा रखते है लेकिन वे ऐसा नहीं कर पा रहे है। संविधान की आठवीं सूची में राजस्थानी नहीं है। शिव विधायक सहित कई विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को प्रार्थना पत्र दिया है कि उनको राजस्थानी में बोलने की विशेष अनुमति दी जाए।
असल में 30 मार्च 1949 को राज्य के अस्तीत्व में आते ही यह मांग उठ चुकी थी कि राजस्थानी को भी संविधान की आठवीं सूची में शामिल किया जाए लेकिन राजस्थानी की लिपि का अभाव होने और भिन्न-भिन्न क्षेत्र में राजस्थानी की उपभाषाएं मेवाड़ी, मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती, हाड़ोती बोलियां होने से बाधा बनी रही है। लंबे संघर्ष बाद भी राजस्थानी अभी तक संविधान की आठवीं सूची में नहीं है।
अब तक पक्ष में हुआ है
- 2003 में राज्य विधानसभा में प्रस्ताव लेकर केन्द्र को भेजा
- केन्द्र ने ओडिशा के वरिष्ठ साहित्यकार एस.एस. महापत्र की अध्यक्षता में कमेटी गठित की
- दो साल बाद कमेटी ने इसकी अनुशंसा की
- 2006 में तत्कालीन गृहमंत्री लोकसभा में आश्वासन दिया, लेकिन बिल अभी तक पेश नहीं
ये 22 भाषाएं अनुसूची में
असमिया, उडिय़ा, ऊर्दू, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, डोगरी, तमिल, तेलगू, नेपाली, पंजाबी, बांग्ला, बोडो, मणिपुरी, मराठी, मलयालम, मैथिली, संथाली, संस्कृत, सिंधी और हिन्दी।
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मैने आवेदन किया है
मैं राजस्थानी भाषा में ही अकसर बोलता हंू। मेरी पहचान का बड़ा आधार ही मेरी यह भाषा है। मेरी ही क्यों, हर राजस्थानी की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति है। मैने प्रार्थनापत्र दिया है कि मुझे राजस्थानी में शपथ लेने की अनुमति दी जाए।
- रविन्द्रसिंह भाटी, विधायक शिव
राजस्थानी भाषा दुनियां की बढिय़ा भाषा में से एक है। संवैधानिक मान्यता नहीं मिलना राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी है। यह राजस्थानियों की जन-जन की भाषा है।
- आईदानसिंह भाटी, ख्यातनाम साहित्यकार राजस्थानी
Published on:
20 Dec 2023 04:40 pm
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