
कांस्टेबल मां ने बेटी को कैसे पढ़ाया कि कर गई टॉप?
दसवीं बोर्ड की परीक्षा में 98.33 अंक हासिल करने वाली सोनू को पहले से विश्वास था कि अंक तो इतने ही आएंगे। मां का प्रोत्साहन, स्कूल का अध्ययन और खुद की मेहनत तीनों इसके हकदार है। सोनू कहती है कि हिन्दी में सौ में से सौ आए,इसकी खुशी है। दोनों मां-बेटी बोली-अब तो जीवन का लक्ष्य आइएएस है।
बाड़मेर पत्रिका.
सोनू के विद्यालय मयूर नोबल्स एकेडमी के प्रबंधक रेवंतसिंह चौहान कहते है कि विद्यालय परिवार ने पूरी मेहनत की। नियमित अध्ययन और प्रोत्साहन का नतीजा है।
सोनू के पिता हरजीराम चौधरी आदर्श चवा में दुकान चलाते है। अंग्रेजी माध्यम होने से हिन्दी विषय पर विशेष ध्यान दिया परिणाम स्वरूप 100/100 अंक प्राप्त किए।
सफलता का राज
- प्रतिदिन 6 से 8 घंटे नियमित अध्ययन किया
- सभी विषयों को समान महत्व
चाहत आइएएस की
भारतीय प्रषासनिक सेवा मे जाना चाहती हूं। सफलता का श्रेय मयूर नोबल्स एकेडमी के कक्षा दशम् प्रभारी ईश्वरनाथ गोस्वामी व सभी विषयाध्यापकों को दिया।
विद्यार्थियों के लिए
पढि़ए और पढ़ते रहिए। सफलता उसी को मिलती है जो उसको हासिल करने के लिए पूरी मेहनत करता है। पढ़ाई के ये दिन आने वाली पूरी जिंदगी के लिए नींव है। खुद को साबित करने के लिए खुद जुट जाइए।
सोनु एक सामान्य परिवार से है व पिता श्री हरजीराम चौधरी आदषज़् चवा में एक दुकान चलाते है, सोनु ने अंग्रेजी माध्यम होने के कारण हिन्दी विषय पर विषेष ध्यान दिया परिणाम स्वरूप 100/100 अंक प्राप्त किए। हिन्दी का अध्यापन डॉ. मागीलाल चौधरी ने करवाया। संयोग की बात है कि चवा गांव में राजकीय सेवा में रहते हुए सोनु की माता श्हिरों चौधरी को भी डॉ. मागीलाल ने हिन्दी विषय में अध्ययन करवाया।
Published on:
14 Jun 2022 11:44 am

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