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कैसे साबित करेे कि वे हैं नि:शक्तजन, यह आ रही समस्या, पढि़ए पूरा समाचार

- नि:शक्तजन प्रमाण-पत्र के लिए भटक रहे विशेषजन

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बीस हजार नि:शक्तजन

बीस हजार नि:शक्तजन

बाड़मेर. विशेष योग्यजन को विशेषज्ञ की सेवाएं नहीं मिलने से प्रमाण-पत्र मिलने में परेशानी आ रही है। जिले में हजारों की तादाद में नि:शक्जन है और 21 श्रेणी में प्रमाण-पत्र देने की सरकारी घोषणा है, लेकिन नेत्र रोग, हड्डी रोग तथा नाक-कान व गला रोग विशेषज्ञ मात्र सात ही हैं। इनमें से भी गांवों में सिर्फ एक चिकित्सक की कार्यरत है। एेसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर पहुंचने वाले मरीजों को शहर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यहां भी काम की अधिकता के चलते कई चक्कर काटने पर यह प्रमाणित होता है कि अमुक व्यक्ति नि:शक्तजन की श्रेणी में है। हालांकि अभी तक केन्द्र सरकार ने सभी श्रेणी को लेकर दिशा-निर्देश जारी नहीं किए, इसके चलते अंधता, अस्थिरोग आदि पांच श्रेणी में ही प्रमाण-पत्र जारी हो रहे हैं।
विभिन्न श्रेणी में नि:शक्तजन या विशेषयोग्यजन को लेकर केन्द्र सरकार ने 21 श्रेणियां मानी है। इनके ऑनलाइन आवेदन जमा होने के साथ डिजिटल प्रमाण-पत्र बना कर दिए जाते हैं। इसमें चालीस फीसदी व इससे अधिक की नि:शक्तता होने पर व्यक्ति को विशेष योग्यजन की श्रेणी में माना जाता है। जिले में इसे लेकर विशेष अभियान भी चलाया गया और गांव-गांव शिविर लगे। बावजूद इसके पर्याप्त तादाद में प्रमाण-पत्र नहीं बन पाए, क्योंकि विशेषज्ञ चिकित्सक ही जिले में पर्याप्त नहीं है।

यह है स्थिति
- जिले की जनसंख्या करीब तीस लाख है। दो शहर बालोतरा व बाड़मेर के साथ 489 ग्राम पंचायतें और 2727 राजस्व गांव हैं। बालोतरा व बाड़मेर में राजकीय अस्पताल है जबकि गांवों व कस्बों में 23 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और 93 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं। इन चिकित्सकालयों में से बाड़मेर के राजकीय अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ, तीन नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक आंख-कान और गला रोग विशेषज्ञ कार्यरत है। गांवों में मात्र एक विशेषज्ञ चिकित्सक आंख-कान और गला रोग का गुड़ामालानी में है।

ऐसी भी है समस्या
-हालांकि सरकार ने फिजिशियन, मेडिकल ऑफिसर को भी अभी यह अधिकार दे दिया है कि वे नि:शक्तजन को प्रमाण-पत्र जारी कर सकते हैं, लेकिन उसके लिए वास्तव में नि:शक्त नजर आए अर्थात्् चिकित्सक को देखने पर लगे ही हां, यह नि:शक्त है तो ही उसे प्रमाण-पत्र दिया जाता है। चालीस-पचास फीसदी तक के नि:शक्तजन को वे भी प्रमाण-पत्र नहीं देते। इसके चलते चालीस-पचास फीसदी तक विशेषयोग्य दर-दर भटकने को मजबूर है।

जिले में इतने प्रमाण-पत्र बने
- डिजिटल प्रमाण-पत्र अभियान शुरू होने के बाद अब तक जिले में 3200 प्रमाण-पत्र बन पाए हैं, इसमें से कई तो पूर्व में प्रमाण-पत्र बना चुके नि:शक्जन इसमें शामिल है। एेसे में नई योजना का नि:शक्तजन को अब तक फायदा नहीं मिल पाया है।

बीस हजार नि:शक्तजन
- जिले में करीब बीस हजार विशेष योग्यजन हैं, जिसमें से अब तक 3200 प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं। करीब पन्द्रह फीसदी विशेष योग्यजन ही प्रमाण-पत्र प्राप्त कर पाए हैं।

थोड़ी दिक्कत पर कार्य संतोषजनक
- विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से थोड़ी दिक्कत तो हो रही है, लेकिन कार्य संतोषजनक ही है। हड्डी रोग संबंधी मामले में ज्यादा समस्या नहीं आती, आंख व नाक-कान, गला संबंधी मामलों में ज्यादा जरूरत होती है। हम नए साल से अभियान चला कर जिले के नि:शक्तजन को प्रमाण-पत्र जारी करेंगे।

- डॉ. कमलेश चौधरी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बाड़मेर