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बागवानी में बढ़ी रुचि, टिश्यू कल्चर के प्रति रुझान

अधिक उत्पादन व रोग प्रतिरोध क्षमता के चलते किसानों की पसंद

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सिवाना क्षेत्र के एक खेत में टिश्यू कल्चर के लगाए गए अनार के पौधे

सिवाना क्षेत्र के एक खेत में टिश्यू कल्चर के लगाए गए अनार के पौधे

सिवाना.
बागवानी खेती से अच्छी मिलती कमाई पर किसानों को इसके प्रति अब रुझान बढऩे लगा है। इस पर क्षेत्र के किसान अनार, बेर, निम्बू, पपीता, खीरा काकड़ी के बगीचे व ग्रीन हाउस लगा रहे हंै। इसे लेकर अब ये टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार किए पौधे लगा रहेे हैं। इस तकनीकी से तैयार पौधों की अच्छी बढ़ोतरी होने के साथ अच्छा उत्पादन मिलता है।वहीं, एक पौधे से कई पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इस तकनीकी से पौधों की रोगक्षमता बढ़ती है। पौधों पर सूक्ष्म जीवों से होने वाली बीमारियों का असर नहीं होता है। इस प्रकार से यह तकनीकी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस वर्ष सिवाना क्षेत्र में अनार के लगे 65 हजार पौधों में से चालीस हजार पौधे टिश्यू कल्चर केे लगे हैं।

अनार उत्पादक क्षेत्र है सिवाना.़
बाड़मेर जिला का सिवाना क्षेत्रफल मरुभूमि का पानी को लेकर समृद्ध इलाका है। यहां गांव-गांव कृषि कुएं होने के साथ लूनी नदी का प्रवाह है। एेसे में पानी की कमी सालों से नहीं रही है। जब पूरा जिला अकाल की चपेट में रहता है तो यहां हरी सब्जियां व फल पैदा होते हैं। कभी सब्जी उत्पादक क्षेत्र रहा यह इलाका अब अनार उत्पादक के रूप में देश में पहचान बना रहा है। यहां करोड़ों रुपए की अनार पैदा होती है। जिसकी मांग पूरे देश के साथ आसपास के देशों में है। अब यहां के किसान अधिक उत्पादन को लेकर टिश्यू कल्चर को अपना रहे हैं। निप्र

किसानों के लिए वरदान-
टिश्यू कल्चर तकनीकी से तैयार किए पौधों में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। इससे उत्पादन भी अधिक मिलता है। पद्धति किसानों के लिए वरदान साबित है।

सम्पतराज पादरू

रोगक्षमता बढ़ती है- टिश्यू तकनीकी से तैयार पौधों की रोगक्षमता बढ़ती है। सूक्ष्म जीवों से होने वाली बीमारियों का असर नहीं होता है। पौधे जल्दी नष्ट नहीं होते हैं। क्षेत्र में किसानों ने करीब चालीस हजार पौधे टिश्यू कल्चर के पौधे लगाए हैं।
जबराराम पर्यवेक्षक

उद्यान विभाग सिवान