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जानिए, 900 पाकिस्तानी हिन्दू क्यों आना चाहते है भारत?

ठहर गई है जिंदगी...900 पाकिस्तानी हिन्दू ब्लैक लिस्टेडसरकार इसको एक कदम आगे बढ़कर तुरंत ही निरस्त करे

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जानिए, 900 पाकिस्तानी हिन्दू क्यों आना चाहते है भारत?

जानिए, 900 पाकिस्तानी हिन्दू क्यों आना चाहते है भारत?

बाड़मेर.
पाकिस्तान के 900 परिवार जिनको ब्लैक लिस्ट किया गया है, उनकी खुशियां स्याह होने लगी है। बेटे-बेटियों के लिए दूल्हे-दुल्हन तलाश करनी है। बूढ़ी मां को देखने आना है। बीवी-बच्चों से मिले हुए सालों हो गए है, अब वे घर परिवार को संभालना चाहते है। ऐसे परिवारोंं के बारे में सरकार को पूरी जानकारी है। इनसे मिलने आने वालों को वीजा समय पर दिया जाए। पत्रिका के अभियान ठहर गई जिंदगी के बाद पाक विस्थापित परिवारों से जुड़े संगठनों और लोगों ने इसके लिए केन्द्र सरकार को बड़ा दिल करने की बात कही है।


सिंध-थार अलग कैसे रहें?
पाकिस्तान का ङ्क्षसध और भारत का थार, यह दोनों अलग कैसे रहें? बंटवारे से पहले एक थे और बाद में भी तमाम पाबंदियों के बावजूद परिवार जुड़े होने से यह इलाका जुड़ा रहा है। 1965 के बाद 41 साल तक थार एक्सप्रेस नहीं चली लेकिन लोग यहां आए और गए। थार एक्सप्रेस चली तो सहूलियत हुई। अब फिर बंद है तो लोग परेशान है। अब ब्लैक लिस्ट कर उनको आने से रोकना, कत्तई ठीक नहीं है। सरकार रहमदिली रखे।- तेजदान चारण खारोड़ा, पाक विस्थापित


हिन्दू परिवारों की मदद हों
पाकिस्तान में बसे हिन्दू परिवार प्रताडि़त हो रहे है। इनमें से ऐस परिवार जो भारत आना चाहते है, उनको यहां लाकर बसाना चाहिए। हिन्दुओं की कम आबादी पाकिस्तान में है और अधिक भारत में। बाड़मेर-जैसलमेर में रिश्तेदारी है तो यहीं बसेंगे। सरकार इनको ब्लैक लिस्ट करने की बजाय आने की सुविधा दें।- बाबूदान चारण, अध्यक्ष ढ़ाटपारकर सोसायटी


थार एक्सप्रेस शुरू हों
थार एक्सपे्रस जब तक शुरू थी, पाक विस्थापितों का यह मसला खत्म हो गया था। वीजा मिलने की आसानी और यहां आकर जाने में परेशानी नहीं होती। परिवार भी कम ठहराव करते कि कोई बात नहीं दुबारा वीजा ले लेंगे। थार एक्सप्रेस फिर से शुरू हों तो सिंध-थार की रिश्तेदारी को नया जीवन मिले।- बद्रीप्रसाद शारदा
900 लोग ब्लैक लिस्ट है, इन परिवारों की सूची सामने लाई जाए। इन परिवारों को भारत आने के लिए वीजा भी मिले और ठहराव की सीमा भी बढ़ाई जाए ताकि यहां आकर वे अपने परिवार के सदस्यों की रिश्तेदारी भी कर सके। जब नाते-रिश्तेदारी के लिए समय की जरूरत है तो मिलना चाहिए। - तरूणराय कागा, पाक विस्थापित पूर्व विधायक