
बाड़मेर. पाकिस्तान के सिंध इलाके में सिंधु नदी के पानी को लेकर आंदोलन तेज होने से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई है। पहलगाम हमले के बाद में पाकिस्तान जहां सिंधु जल रोकने को लेकर भारत से जद्दोजहद कर रहा है तो उधर सिंध और दक्षिण पंजाब में अंतर प्रांतीय कलह को निपटाने का संकट आ गया है। पाकिस्तान की 3.3 अरब की महत्ती ग्रीन पाकिस्तान इनिशिएटिव योजना भी अटक गई है।
सिंधु नदी का पानी पंजाब प्रांत में सबसे ज्यादा पहुंचता है और यह इलाका उपजाऊ है। सिंध पाकिस्तान के अंतिम छोर का इलाका है जहां पानी को लेकर विकट हालात है और पेयजल के लिए भी लोग तरस रहे है। सिंध हिन्दू बाहुल्य इलाका भी है। पाकिस्तान ने हाल ही में 3.3 अरब की ग्रीन पाकिस्तान इनिशिएटिव योजना बनाई है जिससे दक्षिण पंजाब के चोलिस्तान इलाके में 06 नहरों का निर्माण कर इस इलाके की अनुपजाऊ और शुष्क जमीन को उपजाऊ बनाने की योजना है।
सिंध प्रांत इस योजना के विरोध में उतर आया है। सिंध का आरोप है कि पंजाब और सिंध के बीच में पूर्व में जल वितरण को समझौता हो रखा है,जिसको तोड़ा जा रहा है। सिंध के हिस्से का पानी पंजाब को मिलेगा तो सिंध प्यासा ही रह जाएगा। हालात यह है कि पिछले तीन दिन से सिंध के थारपारकर, मिठी, बदाह, सुजावल, कंधकोट, शहदाद कोट, काशमेार, लरकाना, घोटकी सहित अधिकांश इलाको में बाजार , परिवहन और रेल तक बंद करवाकर विरोध हो रहा है। पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी भी इसमें सहयोग कर रही है।
पाकिस्तान ऐसे में दोहरा फंस गया है। अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत ने सिंधु जल समझौता तोडक़र सिंधु नदी का पानी देने से इंकार कर दिया है। इधर पाकिस्तान के ही दो सूबे सिंध और पंजाब आमने सामने होने से अंर्तकलह को निपटाने की परेशानी खड़ी हो गई है।
Updated on:
01 May 2025 01:17 pm
Published on:
01 May 2025 11:48 am
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