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बजट का अभाव-हिल्ली गार्डन की उड़ान को लगे ब्रेक

बजट का अभाव-हिल्ली गार्डन की उड़ान को लगे ब्रेक बाड़मेर. शहर में करीब 150 बीघा में फैला बाड़मेर हिल्ली स्मृति उद्यान पांच वर्ष पहले सरकार से मिले करीब तीन करोड़ रुपए से अस्तित्व में आया। लेकिन अब उसकी कार्ययोजना के विस्तार के लिए बजट ही नहीं है।

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बाड़मेर में निर्मित हिल्ली गार्डन।

बाड़मेर में निर्मित हिल्ली गार्डन।

बजट का अभाव-हिल्ली गार्डन की उड़ान को लगे ब्रेक

बाड़मेर. शहर में करीब 150 बीघा में फैला बाड़मेर हिल्ली स्मृति उद्यान पांच वर्ष पहले सरकार से मिले करीब तीन करोड़ रुपए से अस्तित्व में आया। लेकिन अब उसकी कार्ययोजना के विस्तार के लिए बजट ही नहीं है।

कार्ययोजना के मुताबिक इतने बड़े उद्यान के श्रंखलाबद्ध विकास व रखरखाव के लिए राज्य सरकार से प्रतिवर्ष बजट मिलना था, लेकिन राज्य में सरकार बदलने के बाद बजट के लाले पड़ गए। ऐसे में स्थिति यह है कि उद्यान का बिजली का बिल भरने के लिए विभागीय स्तर पर जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है।

शहर के भीतर जंगल का अहसास

हिल्ली गार्डन की परिकल्पना में जयपुर के कपूर्रचंद्र कुलिश स्मृति उद्यान की तर्ज पर ही इसका विकास व रखरखाव किया जाना तय हुआ। बाड़मेर शहर के मुहाने पर शहर के बीच पहाडिय़ों से घिरी वन विभाग की करीब 150 बीघा जमीन पर हिल्ली गार्डन बनाने करने की रूपरेखा तत्कालीन डीएफओ विक्रम केशरी प्रधान व उनकी टीम ने तैयार की, जिसमें शहर में ही जंगल का अहसास देने वाला सुविधायुक्त पार्क धरातल पर लाने का प्लान बना। राज्य सरकार ने वर्ष 2017-18 के बजट में हिल्ली गार्डन के लिए 2.96 करोड़ रुपए दिए।

जुगाड़ से भर रहे बिल:
राज्य में सरकार व स्थानीय स्तर पर अधिकारी बदलने के साथ ही हिल्ली गार्डन की कार्ययोजना की गति धीमे हो गई। बीते पांच वर्ष में राज्य सरकार ने हिल्ली गार्डन के लिए एक भी नया पैसा नहीं दिया। गार्डन में तीन ट्यूबवेल है, जिनसे यहां लगाए पौधों, केक्टस गार्डन व नर्सरीज को पानी मिलता है। हालत यह हो गई है कि इन ट्यूबवेल का बिजली का बिल भरने में ही वन विभाग को छींके आ रही है।

ये हो सकता है उपाय

जयपुर में वन विभाग के उद्यानों के विकास व रखरखाव के लिए वन विभाग व जयपुर विकास प्राधिकरण के बीच एमओयू की तर्ज पर बाड़मेर हिल्ली स्मृति उद्यान के विकास व रखरखाव की जिम्मेदारी नगरपरिषद के बजट के माध्यम से वन विभाग के जरिए हो सकती है। उद्यान के पूर्ण विकसित होने के बाद पर्यटन शुल्क व अन्य उपायों से धन जुटाकर हिल्ली गार्डन को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

हिल्ली गार्डन का सीमित संसाधनों कर रहे रखरखाव
हिल्ली गार्डन का रखरखाव करने में कई समस्याएं आ रही है। कारण यह है कि गार्डन के रखरखाव के लिए बजट ही नहीं है। सीमित संसाधनों के जरिए जितना संभव हो रहा है, उतना कर रहे हैं।

- चंद्रशेखर कौशिक, क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रथम बाड़मेर