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भाखरडा क्षेत्र में बालिका विद्यालय का अभाव, छूट रही पढ़ाई

उच्च शिक्षा से वंचित रह रही बेटियां

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भाखरडा क्षेत्र में बालिका विद्यालय का अभाव, छूट रही पढ़ाई

भाखरडा क्षेत्र में बालिका विद्यालय का अभाव, छूट रही पढ़ाई

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रमणिया. सिवाना उपखण्ड के भाखरडा क्षेत्र की सात ग्राम पंचायतों में एक भी राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय नहीं है। एेसे में अधिकांश बालिकाएं बीच में पढ़ाई छोड़ चूल्हा-चौका संभालने को मजबूर है।

रमणिया,काठाड़ी, भागवा, धीरा, सेला, कुण्डल व कांखी ग्राम पंचायत एेसी है,जहां बालिका विद्यालय नहीं है। रमणिया ग्राम से 5 किमी की दूरी पर स्थित मोकलसर ग्राम पंचायत में आदर्श बालिका विद्यालय है। कांखी ग्राम पंचायत से 12 किमी दूरी पर स्थित पादरू ग्राम पंचायत में बालिका विद्यालय है, लेकिन पादरू से मोकलसर के बीच में करीब 40 किमी दूरी मेंं कहीं भी बालिका विद्यालय नहीं है।
विज्ञान व वाणिज्य वर्ग के लिए लम्बा सफर - भाखरडा क्षेत्र में जहां एक भी बालिका विद्यालय नहीं है। दूसरी ओर नजदीक में स्थित मोकलसर, पादरू बालिका विद्यालय में विज्ञान व वाणिज्य वर्ग के विषय नहीं है। इस पर इन विषयों की पढ़ाई को लेकर छात्राओं को सिवाना पहुंचना पड़ता है। साधनों का अभाव, अधिक दूरी पर बालिकाओं को परेशानी होती है। इस पर अधिकांश बालिकाएं इन विषयों में प्रवेश तक नहीं लेती है। जरूरत के बावजूद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में बालिका विद्यालय नहीं खोलने से छात्राओं में रोष है।

जमीन आवंटित, विद्यालय स्वीकृत नहीं-
रमणिया गांव में बालिका विद्यालय के निर्माण के लिए 15 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत ने जमीन आवंटित की थी, लेकिन आज तक विद्यालय स्वीकृत नहीं किया। सरकार विद्यालय स्वीकृत करें। - छगनी देवी देवासी, सरपंच रमणिया

ेसिवाना जाना पड़ रहा- गांव सहित आस पास में बालिका विद्यालय नहीं है। घर से दस किमी दूर मोकलसर में बालिका विद्यालय है। यहां विज्ञान संकाय नहीं होने पर इसकी पढ़ाई के लिए 27 किमी दूर सिवाना जाना पड़ता है। - कल्पना गर्ग, छात्रा गांव धीरा

गौरतलब है कि थार में बालिका विद्यालयों की कमी है। लगभग हर ग्राम पंचायत में उच्च माध्यमिक विद्यालय तो है, लेकिन बालिकाओं के अलग से विद्यालय नहीं है। एेसे में पांचवीं के बाद ग्रामीण अपनी बच्चियों को लड़कों के साथ पढ़ाने की जगह पढ़ाई छोडऩे को उचित मानते है। इसके चलते बालिकाओं की पढ़ाई बीच में ही छूट रही है।