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पचास हजार पुस्तकें १२ साल से क़ैद में, विद्यार्थी देख रहे है उनके छूटने की राह

लाइब्रेरियन नहीं, कॉलेज प्रशासन बेपरवाह, विद्यार्थियों को नहीं मिल रही सुविधा

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Lock on college library

बाड़मेर. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पुस्तकालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पिछले 12 वर्षों से पुस्तकालय पर ताला लटका हुआ है। ऐसे में यहां करीब 50 हजारों पुस्तकें होने के बावजूद इनका नियमित लाभ विद्यार्थियों को नहंी मिल रहा है। महाविद्यालय पुस्तकालय शुल्क तो ले रहा है लेकिन नियमित किताबें नहीं मिल रही है। कॉलेज में पुस्तकालय करीब 40 वर्ष पहले स्थापित किया गया था। यहां लाइबे्ररी को व्यवस्थित संचालन शुरू कर अलमारियों में करीब 50 हजार पुस्तकें संग्रह कर एक बड़े हॉल का निर्माण कर पढऩे के लिए टेबल-कुर्सी भी रखे हंै, लेकिन पुस्तकालयाध्यक्ष के अभाव में यह पुस्तकें महज दिखावा बनकर रह गई है।

हर विषय की पुस्तकें हैं
लाइबे्ररी में विभिन्न लेखकों की हर विषय की अलग-अलग पुस्तकें है। यहां सामान्य ज्ञान सहित फैक्लटी की पुस्तकें है। ऐसे में यह पुस्तकों समय पर विद्यार्थियों को मिल जाती है तो उन्हेंं काफी मदद मिलती है। यहां पर नियुक्ति लाइब्रेरियन करीब बारह साल पहले सेवानिवृत हो गए। इसके बाद किसी की स्थाई नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में यहां अन्य व्याख्याताओं को संभालने का चार्ज देकर एक स्थाई कमेटी बनाई हुई है लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में यह महज औपचारिक बनकर रह गई है।

दूर तक कोई सुनने वाला नहीं
महाविद्यालय के विद्यार्थियों की हर बार विरोध प्रदर्शन के दौरान पुस्तकालय खोलने की मांग की जाती है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का सहयोग नहीं मिलने से पुस्तकें तालों में कैद पड़ी है। जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हंै।

कोई सुनने वाला नहीं
यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है। कई बार प्राचार्य व जिला कलक्टर तक को अवगत करवा दिया। इसके बावजूद पुस्तकालय नहीं खुल रहा है। ऐसे में विद्यार्थी परेशान है।
- गजेन्द्रसिंह गोरडिय़ा, छात्रसंघ अध्यक्ष

- यह सरासर गलत हैं
कॉलेज प्रशासन की अनदेखी के चलते विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। गरीब तबके के विद्यार्थी महंगी पुस्तकें बाजार से खरीदने को मजबूर है।
- भूराराम गोदारा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष

रेगुलर नहीं पर जारी कर रहे हंै
पुस्तकालयाध्यक्ष और अन्य पद रिक्त होने से रेगुलर पुस्तक जारी नहीं कर रहे हैं। लाइबे्ररियन व स्टाफ नहीं है। लेक्चरर की कमेटी बनाकर दो-दो पुस्तकें पंद्रह दिन के लिए जारी की गई है। स्टाफ मिले तो रेगुलर किया जा सकता है।
- प्रो. पीआर चौधरी, प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बाड़मेर