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बाड़मेर में टिड्डी हमला : सरकारी आंकड़ों में 52.82 करोड़ की फसल तबाह, हकीकत में अरबों का नुकसान!

- 29 हजार 240 किसान टिड्डी हमले से हुए प्रभावित, केन्द्रीय अध्ययन दल पहुंचा बाड़मेर, प्रशासन के साथ बैठक में जुटाई जानकारी  

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central team reached Barmer

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बाड़मेर. पाक से बॉर्डर पार कर हुए टिड्डी दल के हमले से बाड़मेर जिले में अरबों रुपए की फसल तबाह हो गई। अकेले बाड़मेर में टिड्डी दल ने 43 हजार 266 हैक्टेयर में 26 हजार 240 किसानों की फसल को नष्ट कर दिया। टिड्डी दल से हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए मंगलवार को केन्द्रीय दल बाड़मेर पहुंचा। दल के सदस्यों ने जिला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक में टिड्डी प्रभावित किसानों की जानकारी जुटाई। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि नियमों में बदलाव होना चाहिए। जिससे किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।


जिला प्रशासन की ओर से टिड्डी हमले से प्रभावित 10 तहसील में स्पेशल गिरदावरी करवाई थी। केन्द्रीय दल ने स्पेशल गिरदावरी पर समीक्षा कर जानकारी जुटाई। गिरदावरी के मुताबिक 682 गांवों में फसल नुकसान का आंकलन हुआ था। जिसमें 159 गांव टिड्डी प्रभावित थे। यहां 43 हजार 266 क्षेत्रफल का इलाका प्रभावित हुआ था। अब जिला प्रशासन ने सरकारी आंकड़ों में किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा 52 करोड़ 82 लाख रुपए की मांग रखी है। यह राशि लघु सींमात क्षेत्र के नियम अनुसार मांगी गई है। जबकि हकीकत यह है कि बाड़मेर अकेले जिले में अरबों रुपए की फसलें तबाह हुई है। लेकिन लघु सींमात नियम के अनुसार किसानों को मुआवजा पूरा नहीं मिल पाएगा।

किसानों की पीड़ा को समझना होगा
केन्द्रीय दल के सामने जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि टिड्डी प्रकोप से किसानों की फसलें तबाह हो गई। इससे किसानों के सपने चकनाचूर हो गए। बैठक में बताया कि नियम में बदलाव होना चाहिए, यहां नुकसान ज्यादा होता है, लेकिन मुआवजा कम मिल रहा है। जिला कलक्टर अंशदीप ने कहा कि किसान बिजली बिल माफ करने की मांग कर रहे हैं, उनकी भावनाओं को समझा जाए। साथ ही भविष्य में टिड्डी प्रकोप के नियंत्रण को लेकर प्रभावी संसाधन उपलब्ध करवाने की मांग रखी।

दिनभर ताळी बजाई, रात में किसान की चिंता से मौत
केन्द्रीय दल के सामने बात रखी कि गुड़ामालानी क्षेत्र में एक किसान के खेत में टिड्डी दल का हमला हुआ। किसान ने दिनभर टिड्डी से फसल बचानें के लिए थाळी बजाई, लेकिन फसल टिड्डी ने चट ली, सदमे से किसान की मौत हो गई।


यों समझे नुकसान का आंकलन
लघु सीमांत क्षेत्र के नियम अनुसार दो हैक्टेयर नुकसान का मुआवजा किसान को मिलना है। ऐसी स्थिति एक किसान को 2 हैक्टेयर के अनुसार मात्र 26 हजार रुपए मिलेंगे। जबकि हकीकत यह है कि यहां एक हैक्टेयर में जीरा बुवाई की लागत 36 हजार रुपए आती है।

बाड़मेर : फैक्ट फाइल
- 52.82 करोड़ रुपए की रखी मांग
- 29 हजार 240 किसान प्रभावित
- 43 हजार 266 हैक्टेयर क्षेत्र में हमला
- 345 गांव टिड्डी हमले की चपेट में आए

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