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काजू-बादाम को मात दे रहा मारवाड़ का सूखा साग

-कैर 1000 तो सांगरी मिल रही 600 रुपए किलो-शीतला सप्तमी पर बढ़ जाती है डिमांड -पंचकूटे की सब्जी में आते हंै काम-सूखे साग की विदेशों तक मांग

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काजू-बादाम को मात दे रहा मारवाड़ का सूखा साग

काजू-बादाम को मात दे रहा मारवाड़ का सूखा साग

बाड़मेर पत्रिका. रेतीले इलाके में बहुतायात में होने वाले वाले कैर-सांगरी की विदेशों में मांग बढऩे व शीतला सप्तमी पर घर में बनने वाले ठंडे भोजन के साथ बनने वाले पंचकूटे में इनका उपयोग होने के कारण बाजार में अभी इसके भाव आसमान छूने लगे हैं। थार में काजू-बादाम सस्ते तो कैर सांगरी इनसे महंगे मिल रहे हैं। मारवाड़ी सूखा साग इन दिनों में काजू बादाम के भाव को भी मात दे रहा है।
शीतला सप्तमी पर्व पर ठंडा भोजन में कैर -सांगरी की सब्जी मुख्य रूप से बनती है। सूखे कैर-सांगरी की सब्जी के स्वाद में कोई अंतर नहीं आता हैं। ऐसे में इस सब्जी को ही प्राथमिकता दी जाती है। पंचकूटा के साग में सूखे कैर-सांगरी, कुम्मट, काचरे, साबूत अमचूर, सूखे मेवे आदि डाले जाते हैं। सप्तमी पर अधिकांश घरों में बनने वाली पंचकूटे की सब्जी के कारण भाव आसमान छूने लगे हैं।

विदेशों में होने लगी मांग
मारवाड़ में बहुतायात मात्रा में होने वाले कैर-सांगरी की मांग विदेशों में खूब है। इसकी सब्जी बनने के साथ अचार बनाने के भी काम आती है। ऐसे में खाने में स्वादिष्ट व कई दिनों तक खराब नहीं होने के कारण विदेशों व सितारा होटलों में भी इसकी खास डिमांड रहती है। मारवाड़ी परिवारों के लिए यह एक खास व्यंजन हैं।

मुफ्त में मिलती थे कैर-सांगरी
बिना किसी प्रयास के पैदा होने वाले कैर-सांगरी की सूखी सब्जियों से ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं और पुरुष कैर-सांगरी को एकत्र कर बाजार तक पहुंचाते हैं। कुछ सालों पहले तक गांवों में कैर-सांगरी मुफ्त में मिल जाते थे। अन्य प्रदेशों ओर विदेशों तक जाने से मारवाड़ी सूखे मेवे के भाव लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

मारवाड़ी सूखा साग
सूखे कैर - 1000 रुपए

सांगरी - 600 रुपए
कुम्मट - 120 रुपए

गूंदा - 600 रुपए
साबूत अमचूर - 360 रुपए

काचरा - 150 रुपए
ग्वारफली - 600 रुपए

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मेवों के भाव

काजू- 1000
बादाम - 600

किशमिश- 300
दाख- 350

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बाजार में मांग अधिक है

शीतला सप्तमी पर इसकी विशेष मांग रहती है। ऐसे में यह महंगी मिल रही है। कैर-सांगरी की विदेशों के साथ बड़ी होटलों में इसकी मांग बढ़ी है।
श्रीकिशन भाई अग्रवाल, व्यापारी

कई दिनों तक खराब नहीं होते
पंचकूटे की सब्जी खाने में स्वादिष्ट होने के साथ यह कई दिनों तक खराब नहीं होती है। शीतला सप्तमी को अधिकांश घरों में इसकी सब्जी विशेष तौर पर बनती है।

देवेश गुप्ता, ग्राहक
मेवों से महंगी मिल रही

बाजार में काजू-बादाम से महंगे कैर-सांगरी मिल रहे हैं। इस मौसम में यह स्वास्थ्य के अनुकूल भी मानी जाती है। इसलिए सप्तमी को बनने वाले ठंडे भोजन में यह प्रमुख है।
गुमानसिंह, ग्राहक