
gold medals
तेलंगाना के नालगोड़ा में आयोजित अंडर-14 राष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता में जिले की प्रियंका चौधरी के स्वर्ण पदक जीत कर रविवार सुबह बाड़मेर पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। मालानी एक्सप्रेस से यहां पहुंचने पर ढोल थाली के साथ ग्रामीणों, परिजनों व विभागीय अधिकारियों सहित कई लोगों ने मालाएं पहनाकर बहुमान किया। विद्यार्थियों व खिलाडिय़ों ने जयकारे लगाए एवं सभी का मुंह मीठा करवाया। राष्ट्रीय स्तर पर जिले की तरफ से पहला स्वर्ण पाने वाली प्रियंका अपने पिता हीराराम व गुरुजनों के बीच यहां पर भावुक हो गई एवं सभी से आशीर्वाद लिया गया।
प्रियंका के साथ पांच बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाली अचली, अर्जुनसिंह, छगनी व कोच भागीरथ सिंवल सहित सभी पैदल किसान बोर्डिंग हाउस पहुंचे। सभी ने रामदान डऊकिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर जूडो संघ के जिलाध्यक्ष अचलाराम बेनिवाल, कोच खेमाराम कड़वासरा, खींयाराम कूकणा, सिद्धाराम मायला, किसान बोर्डिंग हाउस के अध्यक्ष बलवंतसिंह चौधरी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कृष्णसिंह राठौड़, प्राचार्य खेताराम चौधरी, विकास अधिकारी टीकमाराम बेनिवाल, तोगाराम, सरपंच विशनाराम, जेताराम थोरी, डॉ. महेन्द्र चौधरी, भीखाराम थोरी, हुकमाराम, नवलाराम धायल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
देश के लिए ओलम्पिक खेलना मेरा लक्ष्य
बाड़मेर. गरल ग्राम पंचायत के दूर दराज व धोरों से घिरे जोगेश्वर कुआं गांव की आठवीं कक्षा में पढऩे वाली चौदह वर्षीय बालिका प्रियंका चौधरी के 62 वीं अंडर 14 राष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के बाद रविवार को किसान बोर्डिंग हाउस में पत्रिका से की बातचीत।
पत्रिका- राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता जीतन पर कैसा लग रहा है?
प्रियंका-गांव व जिले का नाम रोशन करने पर गर्व है।
पत्रिका-इस उपलब्धि के लिए आप किसे श्रेय देंगी?
प्रियंका-अपने चाचा खींयाराम, कोच सिद्धाराम व खेमाराम को श्रेय देती हूंं।
पत्रिका-प्रतियोगिता की तैयारियों को लेकर आपको क्या समस्याएं आई?
प्रियंका-धोरों में संसाधनों की कमी, शिक्षा विभाग की दासीनता व उच्च तकनीक के प्रशिक्षण के अभाव में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
पत्रिका-आपका लक्ष्य क्या है?
प्रियंका-देश के लिए ओलम्पिक खेलों में प्रतिनिधित्व कर मेडल हासिल करना मेरा लक्ष्य है।
पत्रिका-राष्ट्रीय प्रतियोगिता के फाइनल में आपकी क्या प्लानिंग रही?
प्रियंका- 44 किग्रा वर्ग में वर्षों से चैम्पियन हरियाणा की पिंकी से मेरा मुकाबला था। मैने हौसले के साथ अपना स्वाभाविक खेल खेला एवं एक पल भी हिम्मत नहीं हारी।
पत्रिका-अपने घर से इतनी दूर होने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं में खाने को लेकर क्या समस्या रही?
प्रियंका- वहां पर चावल के कारण मुझे बहुत समस्या हुई। रोटी की व्यवस्था नहीं होने के कारण वैकल्पिक काम चलाया।
पत्रिका- गांव में तैयारियों के दौरान आपका डाइट चार्ट क्या रहता है?
प्रियंका- हमारे दो गाय हैं। मैं देशी घी, दूध व बाजरे की रोटी का प्रतिदिन सेवन करती हूं। इससे बढिय़ा डाइट मेरे लिए और नहीं हो सकती है।
पत्रिका-राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले मुकाबलों के लिए आपने कम्प्यूटर या इंटरनेट पर बड़े मुकाबले देखकर तकनीक सीखी।
प्रियंका- विद्यालय व गांव में इस तरह की कोई सुविधा नहीं होने से यह सभी बातें अभी तक सिर्फ मेरे लिए सपना है।
Published on:
16 Jan 2017 12:16 pm
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