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ड्राइवर के 03 बेटे, बायतु की सड़क पर स्कैटिंग कर राज्य पहुंचे… देख रहे नेशनल का सपना

वाकई जब जुनून सिर पर सवार हों और मेहनत की ठान ले तो मंजिलें कदम चूमती है। परिस्थितियां परास्त होती है और संघर्ष जीतता है। देश के लाखों-करोड़ों विद्यार्थियों के लिए 03 सगे भाइयों की यह कहानी उन्हें इतना प्रोत्साहित करेगी कि आप खुद कहेंगे...शाबास।

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ड्राइवर के 03 बेटे, बायतु की सड़क पर स्कैटिंग कर राज्य पहुंचे... देख रहे नेशनल का सपना

ड्राइवर के 03 बेटे, बायतु की सड़क पर स्कैटिंग कर राज्य पहुंचे... देख रहे नेशनल का सपना

परिस्थितियां परास्त -
बाड़मेर.
वाकई जब जुनून सिर पर सवार हों और मेहनत की ठान ले तो मंजिलें कदम चूमती है। परिस्थितियां परास्त होती है और संघर्ष जीतता है। देश के लाखों-करोड़ों विद्यार्थियों के लिए 03 सगे भाइयों की यह कहानी उन्हें इतना प्रोत्साहित करेगी कि आप खुद कहेंगे...शाबास।
कबाड़ से सपने की शुरूआत
बाड़मेर जिले के बायतु पुराना गांव के साधारण ड्राइवर मुश्ताक अली का बड़े बेटे अलताफ हुसैन को 2020 में कबाड़ में एक जोड़ी स्कैटिंग मिल गई। घर ले आया और वह इसको बांधकर प्रेक्टिस करने लगा। पिता मुश्ताक ने कहा गिर जाएगा..इसको फैंक दे। बच्चे ने जिद्द नहीं छोड़ी, मां ने कहा खेलने दो।
रुचि ने बढ़ाया आगे
कुछ समय बाद बच्चे ने मां से कहकर ऑनलाइन 2000 रुपए स्कैटिंग की जोड़ी मंगा ली। वह जब इस पर गांव की सड़क पर प्रेक्टिस करने लगा तो पड़ौसी पूनमाराम को आश्चर्य हुआ और उसने मुश्ताक को सलाह दी कि इसको खेल में आगे बढ़ाओ, मेरी बेटियां भी तीरंदाजी में राज्य तक पहुंची है।
अब पिता हो गए साथ
बात मुश्ताक को जच गई। उसने स्कैटिंग मंगवाकर स्कूल में संपर्क कर बाड़मेर जिला स्तर पर खेलने को भेज दिया, जहां जिले में प्रथम आ गया। फिर जोधपुर प्रतियोगिता में भेजा,यहां स्कैटिंग कमजोर होने पर रोकते हुए कहा कि कम से कम 22 हजार की स्कैटिंग लानी होगी। मुश्ताक ने बेटे की प्रगति पर यह स्कैटिंग ली और यहां भी अलताफ ने राज्य स्तर पर चयन करवा लिया।
01 लाख के स्कैटिंग खरीदे
राज्य स्तर पर अलताफ के साथ दूसरे बेटे जावेद का भी चयन हो गया। यहां इन दोनों के लिए 1 लाख रुपए में स्कैटिंग खरीदकर दिए लेकिन फिर भी पांच सैकेंड के अंतराल में दूसरे स्थान पर रहे। अब, मुश्ताक को बताया कि इससे महंगे हों तो बात बने।
फिर सड़क पर प्रेक्टिस और सपना बड़ा..
ड्राइवर मुश्ताक हारा नहीं हैै। उसके तीनों बच्चे नवीं में अलताफ, सातवीं में पढ़ रहा जावेद अख्तर और पांचवीं में का विद्यार्थी मेहबूब अली बायतु पुराना गांव से रवाना होते है। अपनी गाड़ी में उस सड़क पर मुश्ताक ले जाता है जो नई औैर अच्छी बनी है। तीनों बच्चे यहां स्कैटिंग की प्रेक्टिस करते है। मुश्ताक को अब सरकारी-गैरसरकारी सहायता की जरूरत है जो उसके बेटों के राष्ट्रीय स्तर तक जाने के सपने को पूरा करे। अभी तो वो बायतु की नई सड़कों पर संघर्ष की रफ्तार पर अपने बच्चों के साथ खड़ा है।