
डॉ. रिछपालसिंह, एसोसिएट प्रोफेसर बॉटनी, राजकीय महाविद्यालय लूनी,गांव से शहर और ऑनलाइन तक आते-आते 2500 रुपए किलो बिकते हैं कैर-सांगरी
बाड़मेर. कभी गांवों तक सीमित रहे कैर-सांगरी आज दुनिया के कौने-कौने तक पहुंच चुके है। बेहतरीन स्वाद और खासकर पूरी तरह प्राकृतिक रूप से पैदावार के कारण लोगों के लिए सांगरी के साथ कैर भी पहली पसंद बन चुके हैं। आज जितनी डिमांड स्थानीय स्तर पर नहीं है, उससे ज्यादा दूसरे प्रदेशों और विदेशों तक है। ई-कॉमर्स कंपनियों के चलते ऑनलाइन पर सांगरी- कैर आ जाने से यह आसानी से कोई भी मंगवा सकता है, जो सीधे डोर स्टेप पर पहुंच जाते है।
पश्चिमी राजस्थान में गर्मी में इसकी पैदावार होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में जब सांगरी कच्ची होती है तो स्थानीय स्तर पर कीमत 100-120 रुपए प्रति किलो तक होती है। इसी भाव में कैर भी मिलते है। सूखने पर पैदावार वाले क्षेत्र में ही कैर-सांगरी की कीमत करीब 5 गुणा तक बढ़ जाती है। जबकि दूसरे राज्यों में 1500-1800 रुपए प्रति किलो पर बिकते हैं। जबकि ऑनलाइन पर कैर-सांगरी की कीमत 2200-2500 रुपए प्रति किलो तक है।
सूखी सब्जी के रूप में पहचान
कैर-सांगरी वैसे तो राजस्थान में सीजन में आते हैं, तब इनकी सब्जी और अचार बनाया जाता है। लेकिन कैर-सांगरी जब सूख जाते हैं, इसके बाद बनने वाली सब्जी ज्यादा स्वादिष्ट होने के कारण पसंद की जाती है। सूखे कैर-सांगरी की सब्जी कभी भी बनाई जा सकती है। खासकर बड़े आयोजन में पंचकूटा की सब्जी में मुख्यत: कैर सांगरी ही होती है। यह विशेषकर राजस्थान में ज्यादा प्रचलन में है।
पूरी तरह प्राकृतिक पैदावार
सांगरी और कैर का उत्पादन प्राकृतिक रूप से होता है। इसके लिए किसी तरह की खेती नहीं करनी पड़ती है। खेजड़ी पर सांगरी लगती और झाड़ पर कैर लगते हैं। इसमें किसी तरह की खाद और दवा का प्रयोग नहीं होने से यह सब्जी पूरी तरह से शुद्ध होती है।
तापमान 40 डिग्री के ऊपर तब आती है सागरी
गर्मी जब बढ़ती है, उसके बाद खेतों में खेजड़ी पर सांगरी आना शुरू हो जाती है। इसी तरह तेज गर्मी में कैर का उत्पादन बढ़ता है। सांगरी, कैर और कुमट की ग्रामीण क्षेत्रों में बहार होती है, जब तापमान 40-42 डिग्री के बीच पहुंच जाता है।
औषधीय गुणों वाली सब्जी
सांगरी-कैर में विटामिन ए, कैल्शियम, आयरन व कार्बोहाइड्रेट होता है। यह एंटी ऑक्सीडेंट भी है। स्वाद के साथ जो रोग प्रतिरोधकता बढ़ाती है। कैर के डंठल से चूर्ण भी बनता है जो कफ और खांसी में काम आता है।
ऐसे बढ़ते जाते हैं कैर-सांगरी के दाम
-कच्चे कैर-सांगरी सांगरी बिके 150-160 रुपए प्रति किलो
-स्थानीय बाजार में 1000-1200 रुपए प्रति किलो सूखे कैर-सांगरी
-अन्य प्रदेशों में 1500-1800 रुपए प्रति किलो है दाम
-कोलकाता के बाजार में 1800-2000 रुपए किलो मिल रही सूखी सांगरी
-ऑनलाइन पर 2200-2500 रुपए प्रतिकिलो के भाव से बिक्री
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एक्सपर्ट व्यू
कैर-सांगरी की विशेषता यह है कि इनका उत्पादन पूरी तरह प्राकृतिक रूप से होता है। दोनों की बुवाई नहीं होती है, स्वत: पैदा होने के कारण यह किसी औषधि से कम नहीं है। शरीर की रोग प्रतिरोधकता बढ़ाने के साथ कई तरह के रोग को खत्म करने के तत्व भी इसमें है। कैर-सांगरी शरीर में एक तरह का एंटी ऑक्सीडेंट का काम करते है। औषधीय गुणों के कारण इस सब्जी की राजस्थान में खास पहचान है।
डॉ. रिछपालसिंह, एसोसिएट प्रोफेसर बॉटनी, राजकीय महाविद्यालय लूनी
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Published on:
22 May 2022 08:46 pm
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