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बाड़मेर में केसरिया साफे में आन-बान-शान से निकले राजपूत

- विजयदशमी पर निकली पथ-प्रेरणा यात्रा, शहर में जगह-जगह हुआ स्वागत  

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barmer rajput

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धोखा हुआ है तो मौके पर सबक सिखाना सीखो- खाचरियावास

बाड़मेर. विजयदशमी पर राजपूत समाज की ओर से शनिवार को नागणेच्यां माता गढ मंदिर से पथ प्रेरणा यात्रा निकाली गई। गढ़ मंदिर पर नागणेच्यां मंदिर पर विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया गया। इसके बाद पारंपरिक तरीके से यात्रा आरंभ हुई, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए राणी रूपादे संस्थान पहुंची। जहां सभा का आयोजन हुआ।


यात्रा में शामिल समाज के सदस्य केसरिया साफा बांधे हुए हाथ में केसरिया ध्वज लेकर शस्त्रों के साथ अलग-अलग टुकडिय़ों में रवाना हुए। यात्रा में घोड़ों पर केसरिया साफे, तलवार और राजपूती पोशाक के साथ सवार थे। रावत त्रिभुवनसिंह के नेतृत्व में राजपूत समाज के लोग केसरिया साफा पहने हुए कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। यात्रा गढ मंदिर रोड, गांधी चौक, स्टेशन रोड, अहिंसा सर्किल, अस्पताल रोड, रॉय कॉलोनी, तनसिंह सर्किल, सरदारपुरा होते हुए राणी रूपादे संस्थान पहुंची। मुख्य मार्गो में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शहरवासियों ने स्वागत किया। अपने आवास के बाहर विधायक मेवाराम जैन ने स्वागत किया।

धोखा हुआ तो मौके पर सबक सिखाओ
राणी रूपादे संस्थान में वक्ता प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रतापसिंह खाचरियावास ने भाजपा की ओर से पिछले चुनावों में जसवंतसिंह को टिकट नहीं देने पर समाज की नाराजगी की ओर संकेत करते हुए कहा कि जिस किसी ने भी समाज के साथ धोखा किया है, उनको मौके पर सबक सिखाना सीख जाओ। कोई भी पार्टी ताकत देखकर अपने पीछे आती है। जाति व समाज की ताकत क्या थी, यह सबको पता है। राजपूत समाज के भैरोंसिंह शेखावत तीन बार मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने कहा कि राजनीति में दुश्मनी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आनंदपाल सहित अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कैसी निकम्मी सरकार है जो हादसा होने के बाद जागती है।

कलम नहीं अब तलवार से इतिहास लिखो

श्री राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेवसिंह गोगामेड़ी ने श्री क्षत्रिय युवक संघ के बताए हुए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अत्याचार का मुकाबला करें। अब कलम नहीं तलवार की नोक से इतिहास लिखना होगा। उन्होंने कहा कि अपमान का बदला लेके रहेंगे।
शिक्षाविद् कमलसिंह महेचा ने कहा कि हमारी संस्कृति व संस्कार छतीस कौम का मार्गदर्शन करते हैं। तनसिंह की लिखी पुस्तकों से प्ररेणा लेकर आगे बढ़ें। व्यवसाय के साथ इतिहास का विचरण जरूर करें। इतिहास कहीं गलत लिखा हुआ है तो उसका विरोध करें। समाजसेवी व भामाशाह मेघराज सिंह रॉयल ने भी विचार रखे। रावत त्रिभुवनसिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

यात्रा में हरिसिंह आंटा, स्वरूप सिंह चाडी, हीर सिंह रणधा, जोगेंद्र सिंह रामसर, कृष्ण सिंह राणीगांव, भभूत सिंह आगोर, सांग सिंह लूणू, गोवर्धन सिंह लूणू, उगम सिंह राणीगांव, कंवराज सिंह गोरडिया, गणपत सिंह आगोर, महिपाल सिंह चूली, लाल सिंह रामदेरिया सहित समाज के कई मौजिज लोग मौजूद रहे। यात्रा में महेन्द्रसिंह तारातरा, नेपालसिंह तिबणियार, तनवीरसिंह फोगेरा, निरंजनसिंह भदरू, स्वरूपसिंह आगोर सहित युवाओं ने सहयोग किया। संचालन मांगूसिंह बिशाला व दीपसिंह रणधा ने किया।