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सड़क पर बिछ गई रेत की चादर, सरकार की इस अनदेखी की सजा भुगत रहे है ग्रामीण

सरकार ने नहीं बिछाया डामर, बिछ गई रेत की चादर

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trouble ,asphalt on the road

People are having trouble because not asphalt on the road

कल्याणपुर. चारलाई कलां से थोरियों की ढाणी पांच किलोमीटर ग्रेवल सड़क बनी हुई है, इस सड़क के डामरीकरण की लोग लंबे समय से मांग कर रहे है, लेकिन आज दिन तक इस पर डामरीकरण नहीं किया गया। इस पर क्षतिग्रस्त ग्रेवल सड़क व जमी रेत पर आवागमन में हर दिन ग्रामीणों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का इस ओर अभी तक किसी का ध्यान नहीं गया है। जबकि ग्रामीणों इस समस्या के बारे में और डामरीकरण करवाने की मांग को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है। लेकिन महज आश्वासन के अलावा धरातल पर किसी भी प्रकार का कार्य नजर नहीं आ रहा है।
सड़क बनने के बाद से अब तक सही मरम्मत तक नहीं करवाई। इस पर जगह-जगह से टूटी ग्रेवल सड़क व एक किलोमीटर दूरी के भाग में जमा रेत पर आवागमन में हर दिन ग्रामीणों को बड़ी परेशानियां उठानी पड़ती है।
आसपास ढाणियों की बालिकाएं जो साइकिल पर नागाणा पढने के लिए जाती है। उन्हे दिक्कत होती है। कई बार हल्के चार पहिया वाहन रेत में धंस जाते है। नागणेशी माता जाने के लिए यह सड़क सम्मर्क मार्ग का काम करती है। इस सड़क पर श्रद्धालु भी परेशानी सहने को मजबूर है। परेशान ग्रामीण कई बार सरकार व जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत करा चुके है और डामरीकरण करवाने की मांग कर चुके है। लेकिन आश्वासन ही मिल रहे है।

आपातकाल में मुंह मांगा किराया
इस सड़क से जुड़े गांवों में बीमारी, प्रसव व जरूरी काम के दौरान जब भी वाहन किराए पर ले जाना होता है तो वाहन चालक मुंह मांगा किराया मांगते है। उनका तर्क यह है कि यह सड़क टूटी हुई है। ऐसे में वाहन लाने- ले जाने में दिक्कत होती है। लोगों को मजबूरी में दुगुना किराया देकर भी वाहन किराये करना पड़ता है।

डामरीकरण की जरूरत
ग्रामीणों व छात्रों की परेशानियों को लेकर शीघ्र सड़क का डामरीकरण करवाएं। इससे वर्षों से परेशान लोगों को राहत मिल सके।