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दूषित माहौल के बीच इलाज कराने को मजबूर मरीज

- राजकीय अस्पताल में सीवरेज लाइन चॉक, फैल रही दुर्गंध

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दुर्गंध के चलते मरीजों व चिकित्साकर्मियों को परेशानी हो रही

दुर्गंध के चलते मरीजों व चिकित्साकर्मियों को परेशानी हो रही

बालोतरा.
स्वच्छ भारत अभियान के दौर में जहां सबसे ज्यादा स्वच्छता की जरूरत है, वहीं पर गंदगी का आलम है। यह स्थिति स्थानीय

राजकीय नाहटा अस्पताल की है, जहां मरीजों को दुर्गंध के बीच इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जरूरत है तो बस एक स्वीकृति आदेश की,

जिसके लिए फाइल सरकार को भेजे हुए लम्बा समय बीत गया है, लेकिन सरकार की तंद्रा है की टूट ही नहीं रही।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्रदेश सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने नगर पालिका, नगर परिषद सहित अन्य निकाय क्षेत्रों में सरकारी चिकित्सालयों में पुरानी सीवरेज व्यवस्था के जीर्णोद्धार व नई सीवरेज बिछाने के प्रस्ताव मांगें थे। इस पर नगर परिषद प्रशासन ने करीब 5 माह से पूर्व नगर के राजकीय नाहटा चिकित्सालय का प्रस्ताव तैयार कर सरकार व विभाग के निदेशक को भिजवाया था। इसमें 36 लाख लागत से पुरानी सीवरेज लाइन की मरम्मत व नई सीवरेज लाइन बिछाई जानी प्रस्तावित है, लेकिन अभी तक इसे स्वीकृत नहीं किया गया है।

दुर्गंध भरा माहौल - नगर के राजकीय नाहटा चिकित्सालय में करीब 30 वर्ष पूर्व सीवरेज लाइन बिछाई गई थी। यह लाइन जगह-जगह से अवरुद्ध हो गई है। इसके चलते शौचालय का गंदा पानी इधर-उधर फैल जाता है, जिससे फैलने वाली दुर्गंध के चलते मरीजों व चिकित्साकर्मियों को परेशानी हो रही है। कई बार तो दुर्गंध इतनी अधिक होती है कि ये लोग नाक पर कपड़ा या रूमाल रख गुजरते हैं। इनका जी मचलता है। ऐसे में भिजवाए प्रस्ताव को सरकार व स्वायत्त शासन विभाग के स्वीकृत नहीं करने से इनका सुख चैन छीन गया है।

शौचालयों की स्थिति खराब-
चिकित्सालयों के शौचालयों की स्थिति बहुत ही खराब है। पानी डालने पर भी मलमूत्र का निस्तारण नहीं होता है। उपयोग करने पर परेशानी होती है।

- नमाजी बानो
अवरुद्ध हो जाते हैं शौचालय-

सफाईकर्मी शौचालयों की सफाई करते हैं, लेकिन इसके बाद चार पांच जनों के इनका उपयोग करने पर ये अवरुद्ध हो जाते हैं। फैलने वाली दुर्गंध पर जी मचलता है।
हिमताराम, मरीज

स्वच्छ सांस को तरस रहे- सरकार एक ओर स्वच्छता को बढ़ावा देने को लेकर कार्य कर रही है, दूसरी ओर नगर के राजकीय नाहटा चिकित्सालय की सीवरेज व्यवस्था बिगड़ी हुई है। इससे फैलने वाली दुर्गंध पर स्वच्छ सांस के लिए तरस जाते हैं।
- देवाराम, मरीज

प्रस्ताव भेजा पर स्वीकृत नहीं- सरकार के प्रस्ताव मंगवाने पर नगर परिषद ने इसे तैयार कर भिजवाया था, लेकिन स्वीकृत नहीं हुआ है। विभागीय उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवाया है। स्वीकृति व कार्य पूरा होने पर ही बेहतर व्यवस्था संभव है।

- डॉ. बलराजसिंह पंवार, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी नाहटा चिकित्सालय


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