कार्यक्रम: गढ़मंदिर में 1100 कन्याओं का किया पूजन
बाड़मेर. चतुर्दशी के अवसर पर शहर के पश्चिम में 540 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित जोगमाया गढ़ मंदिर में सोमवार को शक्तिस्वरूपा 1100 कन्याओं का तिलक लगा व मौली बांध कर पूजन किया गया। मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से भक्तों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर भर की कन्याएं व उनके परिजन शरीक हुए। कोरोनाकाल के बाद पहली बार हुए इस तरह के आयोजन में बाड़मेर शहर सहित के कल्याण, सुख व समृद्धि की कामना की गई।
पूजन कार्यक्रम के बाद बालिकाओं को भोजन प्रसाद करवाया गया और उपहार देकर धार्मिक रीति रिवाज से विदा किया गया।
हवन से कार्यक्रम की शुरूआत-
व्यवस्थापक गोरधनसिंह लूणू ने बताया कि मंदिर के पुजारी राहुल शर्मा व साथी पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ करीब ढाई घंटे तक हवन करवाया।
सुंदरकांड पाठ की स्वर लहरियां गूंजी। आरती के बाद कन्या पूजन व भोजन प्रसाद शुरू हुआ। रतनलाल छाजेड़ की ओर से भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई।
ऐसे हुईं तैयारियां
पूजन का भाव यह
हमारी संस्कृति में कन्या पूजन व कन्याओं को भोज करवाने की परम्परा रही है। कार्यक्रम में आम तौर पर 12 वर्ष की उम्र तक कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि कन्याओं का पूजन आराध्या देवी मां का ही पूजन है। कन्याओं को भोज करवाना देवी मां को भोज करवाना है।
पूजन कार्यक्रम के लिए बालिकाओं को न्यौता भिजवाया गया। नगर परिषद ने मंदिर की 500 सीढिय़ों से लेकर पूरे मंदिर परिसर की शनिवार को एक दिन में साफ सफाई करवाई। परिषद के 57 सफाईकर्मियों की टीम ने सफाई के साथ-साथ फॉगिंग की।
416 वर्ष पुराना मंदिर
बाड़मेर गढ़ के रावत त्रिभुवनसिंह ने बताया कि श्री जोगमाया गढ़ मंदिर करीब 416 वर्ष पहले सन 1606 में आधुनिक बाड़मेर की स्थापना के साथ ही प्रतिष्ठापित हुआ। राव भीमा ने बाड़मेर गढ़ की नींव रखने से पहले माताजी के मंदिर की नींव रखी। गढ़ पर स्थित होने के कारण इसका नाम गढ़ मंदिर पड़ा। सन 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान में 21 बार बाड़मेर शहर पर बमवर्षक हमले किए, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई। लोगों ने इसे श्री गढ़ जोगमाया का चमत्कार माना और कहा कि माताजी ने सबकी रक्षा की। एकाएक गढ़ मंदिर के प्रति आमजन की श्रद्धा बढ़ गई और मंदिर का स्वरूप व्यापक हो गया।