बाड़मेर. रेलवे में इलेक्ट्रीफिकेशन का कार्य तेजी से चल रहा है। बाड़मेर से बालोतरा तक लाइन का काम पूरा होने पर गुरुवार को प्लेटफार्म नम्बर दो से इलेक्ट्रिक लोको सात कोच की ट्रेन के साथ ट्रॉयल पर दौड़ा। बाड़मेर से 96 किमी दूर बालोतरा तक ट्रेन बिना रुके 100 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली। प्रारंभ में लाइन पर पहली बार बिजली इंजन के ट्रॉयल के मौके पर प्रिंसीपल चीफ इलेक्ट्रिक इंजीनियर ने पूजन किया।
बाड़मेर से इलेक्ट्रीफिकेशन के ट्रॉयल के लिए सात कोच की स्पेशल ट्रेन से अधिकारी यहां पहुंचे। शाम 4.44 बजे स्पेशल ट्रेन यहां से रवाना होकर बालोतरा पहुंची। इस दौरान रेलवे के अधिकारी और कार्मिक स्पेशल ट्रेन में साथ रहे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जनवरी में बालोतरा-समदड़ी के बीच इलेक्ट्रीफिकेशन का ट्रॉयल हुआ था।
इस साल में मुनाबाव तक विद्युतीकरण
विद्युतीकरण का कार्य दिसम्बर महीने में मुनाबाव तक पूरा करने का लक्ष्य है। रेलवे की ओर से नए साल में बाड़मेर से इलेक्ट्रिक लोको से ट्रेन संचालन करना है। मार्च महीने में कवास तक विद्युतीकरण कार्य का टारगेट दिया गया था। टीम ने तेजी से काम करते हुए बाड़मेर तक पूरा कर दिया।
ट्रॉयल के दौरान ये रहे मौजूद
रेलवे के प्रिंसीपल चीफ इलेक्ट्रिक इंजीनियर राजेश मोहन, सीपीडी पीएल मीणा, राजेश कुलहरी, सीइडीई जगदीश चौधरी, एडीआरएम मनोज जैन, वरिष्ठ डीईई प्रवीण चौधरी व विजय चौधरी मौजूद रहे। इनके अलावा डिप्टी सीईई जितेंद्र कोटडिय़ा, इलेक्ट्रीफिकेशन इंजीनियर्स में चेतन कुमार चौधरी, एमएल मीणा, मदनसिंह, पुष्करराज, एलएम मीणा, शाहीद अंसारी तथा स्टॉफ में रामाराम चौधरी, रमेश चौहान आदि मौजूद रहे।
अब 25 हजार वोल्ट का करंट दौड़ेगा
बाड़मेर तक पहुंचे इलेक्ट्रीफिकेशन के बाद अब बिजली के तारों में 24 घंटे 25 हजार वाेल्ट का करंट दौड़ेगा। रेलवे स्टेशन सहित जहां-जहां ट्रैक पर लाइनें निकल रही है, वहां पर करंट दौड़ रहा है। रेलवे ने बिजली लाइन से सुरक्षा के लिए प्रत्येक रेल फाटक पर बेरियर लगाए है, जिससे निधारित ऊंचाई के वाहनों की ही आवाजाही हो सके। यहां पर 25 हजार वोल्ट के करंट की जानकारी भी अंकित की गई है।