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सरकारी स्कूलों में टांके तो बने, लेकिन नहीं आता बारिश का पानी

-दानदाता नहीं दें सहयोग तो मासूम जेब खर्ची से बुझते प्यास - टांकों का न आगोर बनाया और ना ही छत से जोड़ा

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Rainwater does not fall in the tank

Rainwater does not fall in the tank

चौहटन . सरकार ने सीमावर्ती गांवों के विद्यालयों में बड़े-बड़े टंाके तो बना दिए, लेकिन उनके न तो आगोर बनाए और ना ही छत से जोडऩे की व्यवस्था हुई। ऐसे में प्रयासों और लाखों की राशि खर्च होने के बावजूद समस्या में कोई सुधार नहीं हो पाया है।

स्कूलों में सैकड़ों बच्चों के पानी की जरूरत पूरी करने के अलावा यहां पकने वाले मिड-डे मील व बर्तन साफ करने के लिए पानी की आवश्यकता पूरी करना स्कूलों के लिए महंगा साबित हो रहा है। चौहटन उपखंड के उत्तर-पश्चिमी गांव पानी के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। यहां के भू-गर्भ में पानी खारा है। वहीं, सरकार की ओर से बनाए गए पानी के टांकों को बरसाती पानी से भरने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं।

क्षेत्र के बीजराड़, शोभाला जैतमाल, रमजान की गफन, भोजारिया, देदूसर, नवातला जेतमाल, धारासर, रतासर, जैसार, ढोक, उपरला सहित कई ग्राम पंचायतों में पंचायतीराज विभाग और सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से प्रत्येक स्कूल में एक या एक से अधिक टांकों का निर्माण करवा पानी की जरूरत पूरी करने के प्रयास किए, लेकिन ये कहीं भी कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। स्कूलों में बनाए टांकों को बरसाती पानी से भरने के कोई इंतजाम नहीं होने से ये बारिश में भी पानी को तरसते रहते हैं।
पानी के टैंकर डलवाना मजबूरी-

क्षेत्र की प्रत्येक स्कूल में सैकड़ों बच्चों का नामांकन है। उनके पीने व मिड-डे मील की व्यवस्था के लिए प्रतिमाह एक टैंकर पानी की खपत होती है। यह इन गांवों में 500 से 1000 रुपए तक उपलब्ध हो पाता है। ऐसे में औसतन प्रत्येक स्कूल में सालाना 10 हजार रुपए पानी पर व्यय किए जा रहे हैं।

बचाया जा सकता है यह व्यय
स्कूल के टांकों की क्षमता करीब 12 हजार लीटर पानी की है, वहीं एक टैंकर में 4 हजार लीटर पानी आता है। बरसाती पानी का टांकों में संग्रह से मानसूनी चार महीनों के अलावा टांके का पानी तीन माह तक उपयोग लिया जा सकता है। ऐसे में सात महीने की जरूरत का पानी बरसात से लिया जा सकता है। ऐसे में प्रत्येक स्कूल को सात हजार रुपए की बचत हो सकती है।

बच्चों की जेब पर बोझ

स्कूलों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए विभाग की ओर से कोई बजट का प्रावधान नहीं है। ऐसे में यह खर्च किसी दानदाता के नहीं मिलने पर बच्चों की जेब खर्ची से लिया जाता है।

फैक्ट फाइल :-

कुल पंचायतें - 11
गांवों की संख्या - 60

स्कूलों की संख्या - 60
औसतन पानी पर खर्च - 10,000

कुल व्यय - 6 लाख रुपए