
राजस्थान के चर्चित युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भजन गायक छोटू सिंह रावणा के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए पलटवार किया है। भाटी ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्होंने फोन पर आपत्ति दर्ज करवाई थी, लेकिन उसे 'धमकी' का रूप देना गलत है। भाटी ने दो टूक शब्दों में कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति को किसी के राजनीतिक नैरेटिव का 'टूल' (औजार) नहीं बनना चाहिए।
विधायक भाटी ने इस पूरे विवाद के पीछे की कहानी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि विवाद एक कैंसर पीड़ित बच्चे के वीडियो को लेकर शुरू हुआ।
छोटू सिंह रावणा ने आरोप लगाया था कि भाटी ने फोन पर कहा— "दो बार छोड़ दिया, अब सीधा करना आता है"। इस पर भाटी ने कहा:
रविंद्र सिंह भाटी ने गायक को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज की तारीख में किसी का 'पॉलिटिकल टूल' बनना खुद के लिए नुकसानदेह है।
विधायक ने रावणा के वीडियो और आरोपों को 'सस्ती लोकप्रियता' हासिल करने का जरिया बताया। भाटी का मानना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण कुछ लोग जानबूझकर इस तरह के विवाद खड़े कर रहे हैं ताकि चर्चा में बने रह सकें। उन्होंने जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव से सावधान रहें।
छोटू सिंह रावणा के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब उन्होंने सोशल मीडिया पर रविंद्र सिंह भाटी से जुड़ी एक पोस्ट पर अपना कमेंट किया। गायक का आरोप है कि रात करीब 11 बजे विधायक भाटी का उन्हें फोन आया।
रावणा ने वीडियो में दावा किया कि भाटी ने बेहद सख्त लहजे में उनसे बात की और कहा— "दो बार मैंने तुम्हें छोड़ दिया, अब मुझे तुम्हें सीधा करना भी आता है।" गायक का कहना है कि यह शब्द उन्हें सुधरने की चेतावनी नहीं, बल्कि जान से मारने की अप्रत्यक्ष धमकी जैसे लगे।
भाटी की सफाई के बाद अब गेंद जनता के पाले में है। जहां भाटी समर्थक इसे 'सच की जीत' बता रहे हैं, वहीं रावणा के समर्थक अभी भी विधायक के 'बोलने के लहजे' पर सवाल उठा रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान के इस विवाद ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक नई बहस छेड़ दी है— क्या जनप्रतिनिधि का टोकना 'धमकी' है या 'सुधार की कोशिश'?
Published on:
28 Mar 2026 03:09 pm
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