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अजीत में धार्मिक आयोजन 12 से, गांव में सजावट

तैयारियां जोर शोर से जारी

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अजीत में आयोजित स्नेह मिलन कार्यक्रम को लेकर गांव में की गई सजावट

अजीत में आयोजित स्नेह मिलन कार्यक्रम को लेकर गांव में की गई सजावट


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बालोतरा.
अजीत में श्री अजीत जैन मित्र मण्डल के तत्वावधान में 12 से 14 मई तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग भाग लेंगे। इसको लेकर तैयारियां चल रही हैं।

12 मई सुबह 6.30 बजे आचार्य रविशेखर सूरीश्वर गांव में मंगल प्रवेश करेंगे। जैन समाज की ओर से गाजे-बाजे से उनकी अगुवानी की जाएगी। सुबह 9.15 बजे आचार्य प्रवचन देंगे। इसके बाद बच्चों व महिलाओं की विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। दोपहर में पंच कल्याण पूजा व संघ बैठक, रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन होगा। 13 मई सुबह 6 बजे प्रभातियां व प्रवचन कार्यक्रम होगा। दोहपर में संघ बैठक, चित्रकला व नव्वाणु पूजन, रात्रि में भक्ति संध्या होगी। तीसरे वर्ष के आयोजन को लेकर बोलियां लगाई जाएगी। 14 मई सुबह आठ बजे वरघोड़ा का आयोजन होगा, जो गांव के मुख्य मार्गों से होकर गुजरेगा। दोपहर में धार्मिक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम व बारह व्रत पूजन, रात्रि में भक्ति संध्या व बहुमान कार्यक्रम होगा। अध्यक्ष छगनलाल भूरट, उपाध्यक्ष विजयराज जीरावला, सचिव मनोज भंसाली के नेतृत्व में कपिल भूरट, सतीश जीरावला, दिनेश जीरावला आदि पदाधिकारी व सदस्य व्यवस्थाओं में जुटे हुए हंै।

इधर,असाड़ा में सात दिवसीय भागवत कथा सम्पन्न

असाड़ा(बालोतरा).
माता-पिता व गुरु तीर्थ समान होते हैं। इनका कभी अपमान नहीं करें। इनके आशीर्वाद से आयु बढ़ती है। जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कथावाचक संत प्रेमहरि ने मंगलवार को असाड़ा में श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि संसार में ईश्वर नाम ही सत्य है। इसके अलावा सम्पूर्ण संसार नश्वर है, इसलिए दैनिक जीवन में से कुछ समय निकालकर ईश्वर का स्मरण जरूर करें। कथा वाचक ने कहा कि परोपकार के कार्यों में धन खर्च करने में कंजूसी नहीं बरते,क्योंकि ऐसा करने से धन में कभी कमी नहीं होती है। धन पवित्र होने के साथ इसमें बढ़ोतरी होती है। संसार कर्म प्रधान है। कर्म के अनुसार फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सदैव अच्छे कर्म करें। नशा नाश की जड़ है। नशा करने से व्यक्ति धर्म के मार्ग से भटक कर अनैतिक कार्य करता है। नशा करने से धन, शक्ति व मान नष्ट होता है, इसलिए व्यक्ति को कभी भी नशा नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस दिन जरासंध वध, रूकमणी विवाह आदि प्रसंगों पर प्रकाश डाला। कथावाचक के भजनों से मंत्रमुग्ध श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। रामद्वारा असाड़ा के संत जुगतीराम के सान्निध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत का समापन भी मंगलवार को हुआ। रामद्वारा बुड़ीवाड़ा संत कांशीराम, शोभसिंह महेचा, अचलेशकरण कनाना, उदाराम टांटिया, वजाराम चौधरी, खीमसिंह पुरोहित, मांगीलाल जैन, धमण्डीराम सुथार, हंसराज दर्जी, देवाराम सैन, प्रवीण जैन, विजयङ्क्षसह राजपुरोहित, लालाराम ओड, विक्रमसिंह, खेमाराम पौण, हाथीराम टाटिया, सुजाराम चौघरी, ओमपुरी आदि ने शिरकत की।। लालसिंह सिसोदिया ने आभार ज्ञापित व संचालन भल्लाराम पटेल बासनी ने किया।


8के.