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रेगिस्तान का सच,बेटियों के लिए पढ़ाई सपना

पत्रिका ग्राउण्ड रिपोर्ट : - जहां छात्रावास वहां दसवीं में 69 , जहां 20 किमी दूर परीक्षा केन्द्र वहां 01

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School distance, 20 km away from examination center

School distance, 20 km away from examination center

भीख भारती गोस्वामी

गडरारोड(बाड़मेर ). स्कूल के लिए मीलों का सफर, परीक्षा केन्द्र 20 किमी दूर, बेटियों के लिए ढाणी से गांव तक आने की रोज की प रेशानी का नतीजा है कि सीमावर्ती क्षेत्र में आजादी के 74 साल बाद भी कई गांवों में बेटियांे को पढ़ाने मानस दसवीं से पहले ही दम तोड़ रहा है। दसवीं बोर्ड की परीक्षा में बॉर्डर के कई गांवों में एक तो कई जगह दो-तीन बेटियां ही परीक्षा में बैठी है। बेटियों की शिक्षा के दावे करने वाली सरकारों ने यहां सुविधाएं नहीं दी तो बेटियों ने पढ़ाई छोड़ दी। बॉर्डर के वे गांव जहां बालिका आवासीय छात्रावास है वहां और जहां स्कूल तक नहीं है वहां रातदिन का अंतर सामने आया है।

सीमावर्ती देताणी, खानयाणी, रतरेड़ी तीन गांव है जहां दसवीं की परीक्षा में एक-एक बालिका ही बैठी है। बंधड़ा और खबडाला गांव में दो, शहदाद का पार, जयसिंधर स्टेशन, खलीफे की बावड़ी, सूंदरा, लांबड़ा, चेतरोड़ी में तीन-तीन बालिकाएं परीक्षा देने पहुंचेगी। पूरे इलाके में 15 प्रतिशत से कम बालिकाएं दसवीं तक पहुंच पाई है। आजादी के 74 साल बाद भी देश के सीमांत इलाकों में शिक्षा के इस हाल का कारण जागरुकता की कमी की बजाय शिक्षण सुविधाएं नहीं मिल पाना है। बॉर्डर के गांवों में जहां सुविधा है वहां की तस्वीर अलग है।

यहां सुविधा तो पढ़ रही बेटियां

केस-1 तहसील क्षेत्र में एकमात्र हरसाणी में कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास है। इस कारण हरसाणी में 69 माध्यमिक और 42 उच्च माध्यमिक की परीक्षा में बैठेगी। हरसाणी में बालिका आवासीय छात्रावास होने के कारण छात्राएं सर्वाधिक अध्यनरत हैं।

केस-2 गडरारोड में तहसील का एक मात्र बालिका माध्यमिक विद्यालय है। इस कारण सर्वाधिक 30 माध्यमिक व 30 उच्च माध्यमिक छात्राएं परीक्षा दे रही हैं।

फेक्ट फाइल

05 परीक्षा केन्द्र

835 विद्यार्थी दसवीं परीक्षा दे रहे

623 छात्र

212 छात्राएं

434 विद्यार्थी 12वीं में

308 छात्र

126 छात्राएं

बीस किमी दूर परीक्षा केन्द्र
बीस किमी दूर परीक्षा केन्द्र होने से अभिभावक भेजना नहीं चाहते। आने-जाने में भी काफी परेशानी रहती है।

- रईसा बानो, परीक्षार्थी

गांवों में उच्च शिक्षा का कोई माहौल नहीं है। अधिकतर बीच में ही पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हैं। आवासीय छात्रावास बनने से हम भी आगे पढ सकती है।
- पप्पू कुमारी, परीक्षार्थी

सीमावर्ती क्षेत्र मे बालिकाओं की उच्च शिक्षा बहुत ही दयनीय है।अभिभावकों की चिंता दूर करने के लिए बालिका छात्रावास होना जरूरी है।

- पदमसिह सोढा, व्याख्याता