
बाड़मेर. यूं तो देश की पवित्र नदियों के त्रिवेणी संगम स्थलों पर पवित्र स्नान के लिये कुंभ मेले लगते हैं, लेकिन रेगिस्तान के सूखे बियाबान में स्थित चौहटन में मरूकुम्भ के नाम से विख्यात सूईंया पोषण मेला देश में अपनी अलग पहचान रखता है। मान्यताओं के अनुसार चौहटन के डूंगरपुरी मठ के सान्निध्य में लगने वाला सूईंया मेला कुम्भ के मेलों से भी उच्च मान्यता और पवित्रता के लिये प्रसिद्ध है। पाण्डवों की तपोभूमि एवं डूंगरपूरी महाराज की कर्मस्थली चौहटन में 12 साल के लंबे अंतराल व इंतजार के बाद इस बार मरूकुम्भ सूईंया पोषण स्नान मेला 18 दिसंबर को सोमवती अमावस्या पर भरेगा।
इसमें 10 लाख से भी अधिक श्रद्धालुओं का पवित्र स्नान के लिये आने की संभावना है।
पवित्र स्नान की हैं परंपरा
सूईंया मेले में पवित्र स्नान की मान्यता है। यहां लाखों श्रद्धालु कड़कड़ाती सर्दी में पवित्र स्नान के लिये पहुंचते है। इस दिन यहां सूईंया महादेव मंदिर का झरना, कपालेश्वर महादेव मंदिर का झरना, धर्मराज की बेरी व इंद्रभान तालाब के पांच स्थलों के पवित्र मिश्रित जल से स्नान करते है। इस बार स्नान का मुहूर्त 18 दिसंबर को सवेरे 6 से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। वहीं मेले का आगाज 13 दिसंबर को अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण के साथ ही हो जाएगा। इसी के साथ दूर-दराज से साधु-संतों का आगमन शुरू हो जाएगा।
यहां लगेगी भुजा पर छाप
सूईंया मेले में आने वाले श्रद्धालु अपनी भुजा पर मठ और मेले की छाप लगवाते है। मान्यता है कि देशभर के सभी तीर्थ और मेलों में लगाई जाने वाली छाप चौहटन मठ की छाप से नीचे ही लगती है। अगर किसी ने पहले ही किसी स्थान पर छाप लगा रखी है तो यहां उसके ऊपरी हिस्से में छाप लगती है। साथ ही यहां की छाप लगा कोई श्रद्धालु अन्य स्थान पहुंचता है तो वहां इसके निचले हिस्से में ही छाप लगाई जाती है। सूईंया मेले के दौरान छाप लगवाने के लिये मठ के आगे वाले गेट धर्मराज मंदिर के पास, पीछे वाले गेट पर जाल के पास एवं भजन-सत्संग के मंच के पास छाप लगाने के स्थान निर्धारित किये गये है।
यह योग एक साथ
विक्रम संवत् के अनुसार पौष माह, अमावस्या, सोमवार, मूल नक्षत्र एं व्यातिपात योग का योग एक ही समय में मिलने पर ही सूईंया का पवित्र स्नान मेला लगता है। इस पांच योग के पवित्र संगम पर पांच पवित्र स्थलों के पवित्र जल से श्रद्धालु स्नान करते है।
100 वर्षों में 6 मेले
डूंगरपुरी मठ के महंत जगदीशपुरी महाराज के अनुसार सूईंया मेला कभी 4,7,12 और 17 साल के अंतराल में योग अनुसार लगता है। विक्रम संवत 2000 से 2099 के बीच 16 मेले होने का योग है। अंग्रेजी वर्ष 1943, 1946, 1949,1956, 1970,1974, 1977,1990,1997,2005 में सूईंया का मेला लगा था। वहीं इस बार दिसंबर 2017 में होने वाले मेले के बाद वर्ष 2024, 2027, 2032 एवं 2041 में सूईंया मेला भरेगा।
Published on:
04 Dec 2017 04:21 pm
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