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हादसे के बाद भी नहीं संभल रहे टेम्पो चालक, मासूमों की जान खतरे में

नियमों को ताक पर संचालित हो रही बाल वाहिनियां मासूमों की जान खतरे में, अभिभावक भी बेखबर  
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बाड़मेर

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bhawani singh

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Updated: 20 Apr 2018, 10:55 AM IST

Barmer news

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बाड़मेर. शहर में बाल वाहिनियां नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही हैं। जिला प्रशासन और यातायात पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने के कारण बाल वाहिनी संचालक मासूमों की परवाह किए बिना पैसों के लालच में ठूंस- ठूंस कर भर रहे हैं। इसके बाद शहर के मुख्य मार्गों से निकलती हैं लेकिन जिम्मेदारों को नजर नहीं आती।

पत्रिका टीम ने गुरुवार दोपहर में बाल मंदिर रोड पर बाल वाहिनियों की स्थिति देखी तो उनमें मासूम ठूंस-ठूंस कर भरे हुए थे। टीम ने बाल वाहिनी के फोटो लिए तो संचालक भड़क गया। उसने कहा कि टेम्पों मेरा है जितनी मर्जी उतनी सवारी भरूंगा। जब उससे मासूमों की सुरक्षा के लिए पूछा तो उसके पास कोई जबाव नहीं था। वह उल्टा टीम को कोसने लगा।

नियमों की नहीं परवाह

पुलिस प्रशासन व यातायात पुलिस की ओर से बाल वाहिनी में वाहन की क्षमता के अनुसार सवारिया बैठाने का प्रावधान है। पूर्व में विभाग की ओर से चलाए गए अभियान के बाद बाल वाहिनी संचालक नियमों के अनुसार सवारी बैठाते थे। धीरे धीरे नियमों को भूलकर अब मनमर्जी से सवारियां बैठा रहे हैं।

हादसे के बाद भी नहीं सबक
लगभग एक पखवाड़े पूर्व भादरेश- धन्नौडा मार्ग पर बच्चे बाल वाहिनी में परीक्षा देने जा रहे थे। इस दौरान टैंकर की टक्कर हो गई जिसमें एक मासूम की मौके पर मौत हो गई बाकी घायल हो गए। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर शहर में संचालित होने वाली इन बाल वाहिनियों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर यात्रा करवा रहे हैं।

सुरक्षा के नहीं प्रबंध

बाल वाहिनी में क्षमता से ज्यादा सवारी बैठाने के कारण हरदम हादसे का अंदेशा लगा रहता है। ऐसे में दुर्घटना होने पर बाल वाहिनियों में प्राथमिक उपचार के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि अभिभावकों से हर माह मोटी रकम वसूलते हैं।

जिम्मेदारों को नहीं परवाह

स्कूलों के बाहर से बाल वाहिनियों में बच्चों को ठूंसकर भरा जाता है। इसके बाद भी स्कूल संचालक ध्यान नहीं देते। छुट्टी के बाद जब बाल वाहिनियां बच्चों को घर पर छोडऩे के लिए जाती हैं तो अभिभावक भी इस बात पर एतराज नहीं जताते कि क्षमता से अधिक सवारियां कैसे भरी। ऐसे में दुर्घटना होने पर आनन-फानन में प्रशासन दो चार दिन कार्रवाई करता है बाद में हालात जस के तस हो जाते हैं।