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जैसलमेर के डोंडेवाला में गैस भंडार मिले, बाड़मेर में भी संभावनाओं को बढ़ा रही यह नई खोज

बाड़मेर-सांचौर बेसिन में 2017 से चल रही तेल खोज में अब रेगिस्तानी की गर्मी में पसीना बहने लगा है। सात साल के लंबे अंतराल में बड़ी खोज हाथ नहीं लगी है। डोंडेवाला जैसलमेर की गैस और सांचौर की दुर्गा नाम की छोटी तेल खोज को अभी तेल कंपनियां इतना बड़ा नहीं मान रही।

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Barmer Oil Exploration

फोटो पत्रिका नेटवर्क

Jaisalmer Dandewala Gas Discovery : बाड़मेर। बाड़मेर-सांचौर बेसिन में 2017 से चल रही तेल खोज में अब रेगिस्तानी की गर्मी में पसीना बहने लगा है। सात साल के लंबे अंतराल में बड़ी खोज हाथ नहीं लगी है। डोंडेवाला जैसलमेर की गैस और सांचौर की दुर्गा नाम की छोटी तेल खोज को अभी तेल कंपनियां इतना बड़ा नहीं मान रही। बालोतरा रिफाइनरी के आत्मनिर्भर संचालन के लिए अब बहुत बड़ी खोज का इंतजार होने लगा है। मौजूदा तेल उत्पादन 75 हजार बैरल प्रतिदिन ही है।

राजस्थान के 11 ब्लॉक में तेल खोज का नया कार्य 2017 में शुरू हुआ, इसमें से 10 ब्लॉक बाड़मेर सांचौर बेसिन के बाड़मेर-जैसलमेर जिले में है। एक ब्लॉक बीकानेर जिले में है। इन ब्लॉक में पहले कोरोना की वजह से कार्य प्रभावित हुआ। अब निरंतर 2022 से चल रही खोज के बावजूद अभी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिली है। 100 से अधिक कुओं का खनन होने के बाद यह स्थिति है। इस प्रोजेक्ट पर करीब एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया गया है, जो रिफाइनरी के कार्यशुभारंभ 2017 से शुरू हो गया था।

आत्मनिर्भरता के लिए तेल जरूरी

पचपदरा में 9 मिलियन टन क्षमता की रिफाइनरी निर्मित हुई है। इस रिफाइनरी के लिए पूरा क्रूड ऑयल बाड़मेर-सांचौर बेसिन का काम में नहीं लिया जा सकता है क्योंकि यह बहुत गाढ़ा है। अरब से आयातित तेल की मात्रा अधिक रहेगी लेकिन रिफाइनरी की आत्मनिर्भरता के लिए प्रतिदिन कम से कम 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन की आवश्यकता है। यहां 75 हजार बैरल ही उत्पादित हो रहा है।

डीएनपी और बॉर्डर क्षेत्र की मांग

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार तेल कंपनी की ओर से डीएनपी(डेजर्ट नेशनल पार्क) और बॉर्डर के निकट के इलाके में भी तेल खोज के लिए इजाजत मांगने का प्रयास किया गया है लेकिन इसको लेकर अभी भी नियमानुसार स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। इस कारण रेगिस्तान का एक बड़ा इलाका तेल खोज से वंचित रह रहा है। इसके बाहर के इलाके में बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है।

मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या के बाद?

मुश्किल अब इस बात की भी है कि मंगला, भाग्यम् और ऐश्वर्या तीन बड़ी खोज के तेल भण्डार का लगातार दोहन हो रहा है। छोटे तेल क्षेत्र से अब तेल मिलना कम हो गया है। 2001 से 2026 तक लगभग सत्रह साल के प्रतिदिन के तेल दोहन ने इस भण्डार को कम किया है। अब इसके बाद बड़ी खोज नहीं मिलती है तो क्रूड ऑयल का संकट बढऩे से इंकार नहीं किया जा सकता है।

नई खोज की दरकार

नई खोज की दरकार तो हर समय रहेगी। दूसरा, मौजूदा तेल क्षेत्र का भण्डार लगातार दोहन हो रहा है तो जाहिर है कि प्रतिदिन तेल निकालेंगे तो कम पड़ेगा ही। सरस्वती नदी के पदचिन्हों को आधार मानकर यदि इस खोज को विस्तृत किया जाता है तो सफलता मिल सकती है। तेल की खोज प्रयास है आर सफलता भाग्य, इसलिए उम्मीद से इंकार नहीं किया जा सकता।

अजय शंकर यादव , भूगर्भ विशेषज्ञ