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लॉक डाउन के चलते लॉकर में पहुंची अस्थियां

- 27 जनों की अस्थियां रखी है मोक्षधाम में, लॉक डाउन खुलने पर होगी गंगा में विसर्जित

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लॉक डाउन के चलते लॉकर में पहुंची अस्थियां

लॉक डाउन के चलते लॉकर में पहुंची अस्थियां



दिलीप दवे/ ओम माली
बाड़मेर पत्रिका.
लॉक डाउन के खुलने जिंदा लोग ही नहीं दिवंगत लोगों की अस्थियों को भी इंतजार है। लॉक डाउन के दौरान 27 लोगों की मृत्यु के बाद इनकी अस्थियों को शहर के मोक्षधाम में रखा हुआ है। मान्यता अनुसार अस्थियां तीसरे दिन लेकर परिजन हरिद्वार रवाना हो जाते हैं, लेकिन लॉक डाउन होने से अब हरिद्वार नहीं जा पा रहे हैं। इसलिए अस्थियों को मोक्षधाम के बॉक्स में रखा गया है। लॉक डाउन खुलने पर ही इनको विसर्जित किया जाएगा।
22 से टे्रन, बस सहित बिना अनुमति निजी वाहनों के आवागमन पर रोक लग गई। 22 मार्च के बाद शहर के मोक्षधाम में 70 दाह संस्कार हुए। इनमें से 27 लोगों ने अपने दिवंगत परिजन की अस्थियां घर ले जाने की बजाय मोक्षधाम में ही रखी। जो लॉकर में बंद है । लॉक डाउन खुलने के बाद परिजन गंगा में विसर्जन को ले जाएंगे।
घरों में भी मुख्यद्वार पर रखी अस्थियां- जो लोग लॉक डाउन के दौरान अपने परिजन की अस्थियां घर लेकर गए हैं, वे भी इन्हें घर के मुख्यद्वार या आसपास दीवार में रखे हुए हैं। वे इनकी सुबह-शाम पूजा कर रहे हैं और प्रार्थना भी कि जल्द ही लॉक डाउन खुले तो इनका विसर्जन हो सके।
पगड़ी रस्म व अन्य कार्यक्रम भी अटके- मृत्यु पश्चात 12 दिन तक शोक के कार्यक्रम चलते हैं, जिसमें तीये की बैठक से लेकर बारहवें तक की रस्म है। इन रस्मों में भी अब परिजन नहीं आने से औपचारिकता की गई है। कई लोग बारहवें के कार्यक्रम हरिद्वार में अस्थी विसर्जन बाद ही करवाएंगे। वहीं, पगड़ी दस्तूरी का कार्यक्रम भी कई जगह अटक गया, क्योंकि परिजन पगड़ी लेकर पहुंचे ही नहीं।
अब लाना पड़ा बॉक्स- स्थानीय सार्वजनिक श्मशानघाट में अस्थियां रखने के लिए लॉकर हैं, जिसमें पहले से ही काफी जनों की अस्थियां रखी हुई थी। लॉक डाउन के चलते और ज्यादा अस्थियां आने से अब एक लकड़े के बॉक्स में अस्थियों को रखना पड़ा है। इसमें नाम लिखकर अस्थियों को रखा गया है।
यहीं रख रहे अस्थियां- लॉक डाउन के चलते वाहन की आवाजाही बंद होने से कई जने अस्थियां श्मशानघाट विकास समिति को सौंप कर गए हैं। लॉकर में पहले से ही अस्थियां रखी हुई है, ऐसे में अब बॉक्स में एक साथ कई जनों की अस्थियां रखनी पड़ी है।- भवानीसिंह शेखावत मामा, मुख्य व्यवस्थापक श्मशानघाट विकास समिति
सुरक्षित हैं- हिन्दू धर्म के अनुसार अस्थियां घर में नहीं रखी जा सकती। ऐसे में लोग यहां अस्थियां रख रहे हैं। हम उनकी सार संभाल कर रहे हैं। लॉक डाउन खुलने के बाद शायद परिजन अपनों की अस्थियां लेकर हरिद्वार जाएंगे।- भैरूसिंह फुलवारिया, संयोजक श्मशानघाट विकास समिति।

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