
बाड़मेर के मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले मेडिकल के छात्रों को अगले बैच से हिन्दी माध्यम से भी पढऩे का अवसर मिल सकेगा। 130 नए छात्रों के पास में विकल्प रहेगा कि वे कौनसी भाषा को वरियता देते है। हिन्दी दिवस पर यह तोहफा राज्य सरकार ने दिया है। बाड़मेर और जोधपुर से यह शुरूआत होगी।चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बजट घोषणा की थी। हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी माध्यम में भी चिकित्सा शिक्षा प्रारम्भ किए जाने की सूचना जारी कर दी है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि पहले चरण में डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज, जोधपुर एवं बाड़मेर मेडिकल कॉलेज में इस सुविधा का शुभारम्भ होगा। इन दोनों मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2024—25 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को विकल्प के आधार पर अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों माध्यमों में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान ने बताया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि या हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम में संचालित आयुर्विज्ञान पाठ्यक्रमों में अध्ययन को लेकर कठिनाई होती थी। इसे दृष्टिगत रखते हुए हिंदी माध्यम में भी इन पाठ्यक्रमों के संचालन की घोषणा बजट में की गई थी। हिंदी दिवस के अवसर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस घोषणा को पूरा करते हुए दो मेडिकल कॉलेजों में हिंदी माध्यम से भी अध्ययन की सुविधा प्रारम्भ कर दी है। जल्द ही अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी यह सुविधा प्रारम्भ हो सकेगी।
बाड़मेर के मेडकल कॉलेज में अभी पांच बैच में 650 मेडिकल स्टुडेंट पढ़ रहे है। ये सभी अंग्रेजी माध्यम से ही पढ़ रहे है। इसमें से 130 का सीनियर बैच अपनी पढ़ाई पूरी कर लेगा। प्रथम वर्ष में आने वाले 130 के नए बैच को यह विकल्प मिलेगा।
नीट क्लीयर करने वाले काफी स्टूडेंट्स हिंदी माध्यम से होते है। ऐेेसे में एमबीबीएस की पढाई में केवल अंग्रेजी माध्यम होने से मेडिकोज को काफी परेशानी होती थी। अब ऐसे स्टूडेंट्स जो हिंदी माध्यम के है और एमबीबीएस भी इसी मीडियम से करना चाहते है तो उनके लिए अंग्रेजी के अलावा एक विकल्प हिंदी का भी होगा। हिंदी विकल्प लेने वालों को फिर हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई करनी होगी।
Updated on:
15 Sept 2024 01:06 pm
Published on:
15 Sept 2024 01:04 pm
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