
Traffic system disrupted By having The public upset
बालोतरा.शहर में यातायात पुलिस की कम नफरी से वाहन चालकों की जहां मौज बनी हुई है, वहीं आमजन की परेशानियां बढ़ गई हैं। अधिकांश वाहन चालक नियमों को ताक में रख सुविधा अनुसार वाहन चलाते हैं। इससे यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त होने के साथ दुर्घटनाएं होती हैं।
औद्योगिक नगरी के मुख्य चौराहों के अलावा बाजारों व अन्य स्थानों पर यातायात पुलिस के जवान खड़े नहीं रहने से दुपहिया, तिपहिया व चौपहिया वाहन चालक स्वयं की सुविधा के अनुसार वाहन चलाते व इन्हें बीच मार्ग रोकते हैं। जल्दबाजी को लेकर अधिकांश वाहन चालक विपरीत दिशा से वाहन लेकर गुजरते हैं। सामने से आने वाले वाहनों के चलते यातायात व्यवस्था बिगड़ी जाती है। कई बार वाहन आपस में भिड़ते-भिड़ते बचते हैं। भिड़ंत होने पर चालक व सवार चोटिल तो वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं।
दुपहिया वाहन पर पांच जने सवार- अधिकांश दुपहिया वाहन चालक दो से तीन जनों को बिठाते हैं। कई जने तो चार-पांच जनों को बैठाकर वाहन चलाते हैं। ऐसे में व्यस्त मार्गों पर संतुलन बिगडऩे पर ये राहगीरों से टकराते हैं। कई चालक वाहन चलाते समय मोबाइल फोन लगाते तो रिसीव कर बातें करते हैं। इस दौरान ध्यान भटकने पर राहगीरों से टकरा जाते हैं।
नाममात्र की नफरी - जिले के दूसरे बड़े शहर बालोतरा व क्षेत्र में पिछले वर्षों में वाहनों की संख्या में खूब बढ़ोतरी हुई है। रोजगार , खरीदारी, उपचार आदि आदि कार्यों को लेकर दर्जनों गांवों से हजारों लोग बसों व निजी साधनों से बालोतरा आते हैं। शहर में वाहनों की संख्या पहले से ही अधिक है। इस पर कई वर्षों से यातायात पुलिस की अधिक नफरी की जरूरत महसूस की जा रही है। शहर में यातायात व्यवस्था के लिए 15 जवान है। जबकि बढ़े यातायात दबाब व वाहनों की संख्या पर इतने की ओर जरूरत है।
जनता की जुबानी-
शहर में आम वाहन चालक यातायात नियमों की पालना नहीं करते हंै। इससे यातायात व्यवस्था चौपट हो गई है। पैदल गुजरना मुश्किल हो गया है। - बालकिशन जोशी
शहर में अधिकांश चालक वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं। ध्यान भटकने पर वे राहगीरों से टकराते हैं। यातायात पुलिस इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। - शंकरलाल सलुंदिया
शहर व क्षेत्र में बीते वर्षों में वाहनों की संख्या में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है। यातायात पुलिस नफरी पहले जितनी ही है। इससे यातायात नियमों की पालना नहीं हो रही है। - उत्तमसिंह राजपुरोहित
कम जवान, हो रही दिक्कत- शहर में यातायात का दबाब अधिक है। वन वे व नो एंट्री जोन भी है। इस पर कम जवानों पर व्यवस्था को सुचारू रखना मुश्किल होता है। उच्चाधिकारियों को समय-समय पर अवगत करवा नफरी बढ़ाने की मांग करते हैं। - सपाराम, उप निरीक्षक यातायात प्रभारी
Published on:
22 Dec 2017 03:39 pm
बड़ी खबरें
View Allबाड़मेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
