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मुम्बई की छात्राएं ले रही थार की इस कला का प्रशिक्षण, प्रोटक्शन मिलने की उम्मीद ,जानिए पूरी खबर

- मुम्बई के एक निजी आर्ट इंस्टीट्यूट की बारह छात्राएं ले रही प्रसिद्ध दाबू प्रिंट का प्रशिक्षण - पारम्परिक कला को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जगी है
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Training ,famous daabu printing,twelve students of Mumbai

Training of famous daabu printing taking twelve students of Mumbai

बालोतरा. मुम्बई के एक निजी आर्ट इंस्टीट्यूट की बारह छात्राएं यहां के प्रसिद्ध दाबू प्रिंट का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इससे इस पारम्परिक कला को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जगी है।
शहर में कई परिवार पारम्परिक दाबू प्रिटिंग से जुड़े हुए हैं। मशीनीकरण के युग में ये मशीनों से दूर रह कर हाथों से ही कपड़े की रंगाई-छपाई करते हैं। प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करते हुए ये पारम्परिक डिजायनों में कपड़ा तैयार करते हैं। इससे सीमित माल ही तैयार होता है। महानगरों व बड़े शहरों में इसकी मांग होने पर इन्हें अच्छा मेहनताना मिल जाता है।

हर काम का प्रशिक्षण

स्थानीय दाबू प्रिङ्क्षटग से प्रभावित मुम्बई के एक निजी आर्ट इंस्टीट्यूट की एक दर्जन छात्राएं कुछ दिनों से इसका प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। वे शहर के दाबू प्रिटिंग के कारखानों में पहुंच यहां घंटों बीता कर कपड़े की क्वालिटी, धुपाई, रंग तैयार करने, ब्लॉक से कपड़े की छपाई, सूखाने व इसे बेचने के लिए तैयार करने की प्रक्रिया को समझ रही हैं। इससे एक सौ से अधिक वर्ष पूरानी इस पारम्परिक कला को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जगी है।


दाबू प्रिटिंग कला बहुत ही खूबसूरत है। इससे तैयार कपड़े के रंग खिले नजर आते हैं। प्रशिक्षण में एक- एक बात बारीकी से सीख रही हूं। - सिद्रा
दाबू प्रिटिंग के बारे में सुना था। लेकिन पहली बार कपड़ा तैयार होने की प्रक्रिया देखने को मिली। मेहनत भरा काम है। - रियॉशी

दाबू प्रिटिंग में प्राकृतिक रंग इस्तेमाल करने से इसकी मांग अच्छी है। पारम्परिक डिजायनों पर लोग इसे अधिक पसंद करते हैं। सीख कर कुछ नया करने की कोशिश करूंगी। - मोनाली
दाबू प्रिङ्क्षटग एक सौ से अधिक वर्ष पुरानी कला है। हाथ से कार्य होने पर बहुत मेहनत लगती है। प्रोत्साहन अभाव में सीमित ही कार्यहोता है। कुछ दिनों से छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। उम्मीद है कि इससे कला को प्रोत्साहन मिलेगा। - मोहम्मद अकबर, उद्यमी

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