बाड़मेर. महाकवि माघ के जन्मोत्सव पर श्रीमाली समाज बाड़मेर व वेदाध्ययन समिति के संयुक्त तत्वावधान में माघ जयंती का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ महाकवि माघ की तस्वीर के समक्ष श्रीमाली समाज अध्यक्ष नरेंद्रकुमार दवे एवं मुख्य अतिथि अखिल भारत वर्षीय श्रीमाली ब्राह्मण समाज संस्था पुष्कर के प्रचार-प्रचार सचिव किशोर शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया।
कार्यक्रम में शिक्षाविद महेश दवे ने कवि माघ के जीवन के कृतित्व पर बोलते हुए कहा कि हमें उनकी कालजई रचना शिशुपाल वध के अध्ययन और उसकी शैली से मार्गदर्शन मिलता है। श्रीमाली होने का गर्व है।
महेश दवे ने बताया कि उपमा में कालिदास, अर्थ गौरव में भैरवी तथा पद ललिता में दंडी सम्मान कोई श्रेष्ठ नहीं है लेकिन महाकवि माघ में यह तीनों गुण विद्यमान थे । संचालन करते हुए दिवाकर दवे ने बताया कि ब्राह्मण परिवार में माघ पूर्णिमा के दिन 675 ईसवी में भीनमाल नगरी में जन्मे थे जिनकी 1348 जयंती आज यहां मनाई जा रही है। महाकवि होने के साथ वे महादानवीर भी थे। किशोर शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।
समाज अध्यक्ष ने आभार व्यक्त किया। समाज सचिव सुरेन्द्र शर्मा, वेदाध्ययन समिति अध्यक्ष अरविंद अवस्थी, मनोहर लाल शर्मा , विनोद दवे, अनिल दवे, भूरचंद दवे, सोहन दवे,, विष्णु पुजारी आदि उपस्थित थे।