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कबाड़ के जुगाड़ की जिम में जगा रहे देशसेवा का जज्बा

- गांव के युवाओं ने पुराने टायर, पत्थर आदि से बनाई जिम,

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कबाड़ के जुगाड़ की जिम में जगा रहे देशसेवा का जज्बा

कबाड़ के जुगाड़ की जिम में जगा रहे देशसेवा का जज्बा

दिलीप दवे बाड़मेर. कबाड़ का जुगाड़ बना कर देश की सेवा में जाने का जज्बा युवाओं में जगाया जा रहा है। यह हो रहा है बाड़मेर जिले कुड़ी गांव में जहां युवा सेना भर्ती को लेकर तैयारियां कर रहे हैं। आर्थिक तंगी के चलते जिम का सामान नहीं खरीद पाने पर पत्थर, पुराने टायर, लोहे के सरिए आदि का उपयोग कर व्यायामशाला बनाई है जहां वे कसरत कर सैनिक बनने का सपना बुन रहे हैं।

कुड़ी गांव के नवयुवक सेना में भर्ती होने के लिए जमकर पसीना बहा रहे हैं। सेना भर्ती में लिखित परीक्षा के साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा भी होती है जिसकी तैयारी युवा गांव में कर रहे हैं। गौरतलब है कि जोधपुर में सेना भर्ती परीक्षा अप्रेल में प्रस्तावित है, एेसे में सैनिक बनने का जज्बा लिए युवा कुड़ी गांव में तैयारियां कर रहे हैं। शारीरिक दक्षता को लेकर व्यायाम, दौड़ आदि में सफल हो सके इसलिए उन्होंने जुगाड़ से जिम का निर्माण किया है, जहां अलसुबह एवं देर शाम तक तैयारी कर रहे युवकों का जमावड़ा रहता है।

कई युवा अपने प्रशिक्षक के साथ आ रहे हैं तो कई अपने दोस्तों के साथ। चयनित सैनिक दे बता रहे टिप्स- पूर्व की सेना भर्तियों में शामिल रहे युवक अनुभव के आधार पर उनको टिप्स बताकर तैयारी करा रहे हैं। कुड़ी से उमरलाई जाने वाली सडक़ किनारे एक खेत में युवाओं ने एक जिमशाला बनाई है । यह सब उन्होंने कबाड़ के सामान से जुगाड़ करके तैयार किए हैं। महंगी जिम सामग्री पर आया आइडिया- शहरों में पढ़ रहे गांव के युवाओं ने वहां जिम में रहकर तैयारी तो गांव में भी जिम शुरू करने का सोचा, लेकिन महंगी सामग्री पर उनके दिमाग में जुगाड़ से जिम बनाने का विचार आया। अधिक युवा अपनी फिजिकल फिटनेस तैयारियां कर रहे हैं।

्रयुवाओं ने सीमेंट और कंक्रीट पत्थर की पट्टियों (छीणों) के साथ बेकार टायर, बल्लियां, दरी पट्टियां, घरेलू आटा चक्की के पाट, लकड़ी और निवार की डोरियां लेकर जिम का निर्माण किया।

हमारे गांव के युवा सेना और रक्षा बलों में भर्तियों के लिए तैयारियों में जुटे हैं। इनके शारीरिक मापदंडों को पूरा करने के लिए देसी जिम बनाकर तैयारियां कर रहे हैं। - राकेश चांपाणी, युवा कुड़ी.

गांव में ही जिम जैसी व्यवस्था करने के लिए दिमाग में आइडिया आया। स्थानीय उपलब्ध सामान से व्यायाम के आवश्यक उपकरण तैयार किए गए।- सुबोध गोदारा कुड़ी

अनुपयोग सामान से व्यायामशाला बनाई है। जहां युवा सेना में भर्ती को लेकर मेहनत कर रहे हैं। इनके बुलावे पर कभी-कभी मैं अभ्यास के टिप्स सिखाने जाता हूं।- रुपाराम गोदारा, प्रशिक्षक उमरलाई

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