पाली पत्रिका. मारवाड़-गोढ़वाड़ के तीन जिलों सिरोही, पाली और जालौर की लाइफ लाइन है जवाई बांध। आजादी के 75 साल में इस इलाके में मॉल खड़े हुए है। हाइवे पर सरपट वाहन दौड़ रहे है। नए-नए उद्योगों से लगता है कि आर्थिक उन्नतियां गगन चुुम्बी हो गई है लेकिन जब बात पानी पर आती है..सारी तरक्कियां फीकी पड़ जाती है। मैं जहां घूमा हूं..पाली, मारवाड़ जंक्शन, जेतारण, बाली, समुमेरपुर और सोजत हर जगह एक बात थी कि जवाई-जवाई और जवाई। । इस जिज्ञासावश मैं पहुंच गया जवाई बांध । सामने ..अथाह पानी। क्षमता 7887.50 मिलियन क्युबिक मीटर और 500 वर्गकिमी तक फैलाव। उदयपुर कोटड़ा के सेई और साबरमती इलाके से लेकर पहाडिय़ों की जलराशि जब जमा होती है तो बांध छलकने लगता है। मेरे साथ खड़े चंद्रशेखर कहते है कि बांध छलकने पर यहां खुुशियां छलकती है। अभी सरकार ने जवाई पुनर्भरण योजना बनाई है जो 2554.23 करोड़ की है, इसमें 1110 करोड़ पहले चरण में खर्च होंगे। वर्ष 2027 तक काम पूरा होगा जो बड़ी सौगात है। सच मानिए, जब यह बांध रीतता है खानों में एकत्रित पानी को पिलाना और पीना मजबूरी हो जाता है। जवाई में अभी भरपूर पानी है तो किसानों को खेती को भी मिल रहा है। इससे यहां मेहंदी, अजवायन, अरण्डी, सरसों, गेहूं और अन्य फसलें किसान लेते है।