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thar express थार एक्सप्रेस को क्यों शुरू नहीं कर रही भारत-पाक सरकार

-1965 के युद्ध में हुई थी बंद

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thar express थार एक्सप्रेस को क्यों शुरू नहीं कर रही भारत-पाक सरकार

thar express थार एक्सप्रेस को क्यों शुरू नहीं कर रही भारत-पाक सरकार

फेक्ट फाइल
-1965 के युद्ध में हुई थी बंद
-41 साल बाद 18 फरवरी 2006 को शुरू किया था
- 11 अगस्त 2019 को पुलवामा हमले के बाद किया गया बंद
- 4 लाख यात्री कर चुके थे सफर
- 1 लाख पाक विस्थापित परिवार है बाड़मेर में
बाड़मेर पत्रिका.
भारत पाक के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस 11 अगस्त 2019 से बंद है। इस रेल को भारत और पाक दोनों देश शुरू नहीं कर रहे है।
भारत-पाकिस्तान के विभाजन से पहले यहां रेलमार्ग था और कराची तक रेल जाती थी। 1965 के युद्ध में रेल पटरियां उखडऩे के बाद रेल बंद हो गई और 41 साल बाद 18 फरवरी 2006 को ब्रॉडगेज लाइन बिछाकर दोनों देशों ने इस थार एक्सप्रेस प्रारंभ की जो पुलवामा हमले तक अनवरत 11 अगस्त 2019 तक चली। हर फेरे में करीब 700 यात्री भारत-पाक से सफर कर रहे थे और चार लाख यात्री आए-गए। साप्ताहिक फेरों की यह रेल रिश्तों की रेल बन गई,जिसमें कोई बड़ी अवांछित घटना नहीं हुई।
क्यों बंद किया
पुलवामा हमले के बाद में दोनों देशों मेें तनाव हुआ तो इस रेल को बंद कर दिया गया। 9 अगस्त 2019 को भारत रेल आई और 11 अगस्त को भारत से रेल गई थी। दोनों देशों ने इसके बाद इस रेल को शुरू करने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
क्यों है जरूरी
पाकिस्तान का सिंध और भारत का थार दोनों ही रोटी-बेटी के रिश्ते से जुड़े है। 1947 के बाद करीब एक लाख पाक विस्थापित बाड़मेर में और पूरे देश में लाखों विस्थापित है। अभी भी इन परिवारों के लोगों का पाकिस्तान-भारत आना जाना है। कोई बेटी वहां है तो कोई ***** यहां पर। यहां तक कि मां उधर है तो बेटा यहां रह रहा है। रिश्तों की ऐसी नाजुक डोरी के बीच में खींची सरहद में यह रेल ही मेल-मिलाप का जरिया रही है।
मुनाबाओ में है रेलवे स्टेशन
थार एक्सप्रेस के लिए मुनाबाओ में अंतरर्राष्ट्रीय स्तर का रेलवे स्टेशन बना हुआ है। इस रेलवे स्टेशन पर भारत सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए,जहां इमीगे्रशन व अन्य जांच होती है। थार एक्सप्रेस का संचाल नहीं होने से यह बंद पड़ा है।
उधर अत्याचार भी बढ़ रहा है
पाकिस्तान के सिंध इलाके में लगातार हिन्दूओं पर अत्याचार बढ़ रहा है। अपहरण, बलात्कार और जबरन निकाह करने की घटनाएं आए दिन होने लगी है। इन घटनाओं से दु:खी लोगों की उम्मीद अब भारत की तरफ है। वे अपनों से मिलकर भी अपनी पीड़ा बताना चाहते है लेकिन सिंध के हिन्दूओं के लिए भारत आने का यह रास्ता बंद पड़ा है।