
120 साल पहले बने भारत-पाक रेलमार्ग पर अब एक भी रेल नहीं चलेगी?
बाड़मेर पत्रिका.
अखण्ड भारत के समय करीब 120 साल पहले पटरी बिछाकर यह रेलवे मार्ग बना। 1947 में भारत-पाक बंटवारा हुआ तो हजारों परिवार इसी मार्ग से पाकिस्तान छोड़कर भारत आए। 1965 के भारत पाक युद्ध में जब सेना को मदद की जरूरत हुई तो रेलवे के रेलवेकार्मिक युद्धसैनिक की भूमिका में आ गए और इसी मार्ग से एक रेल में राशन सामग्री लेकर रवाना हुए और बरसतें बमों के बीच रेल लेकर सरहद पर रवाना हुए। रेलवे के 17 कार्मिक इसमें शहीद हुए। यही रेलमार्ग है जो 2006 में मीटरगेज से ब्राडगेज में बदला गया तो भारत-पाक में रोटी-बेटी से जुड़े लाखों पाक विस्थापितों को मिलाकर रिश्तों की डोर जोड़ी लेकिन अब इसी मार्ग पर लोग रेल देखने को तरस गए है। पहले थार एक्सप्रेस को दोनों मुल्कों ने तनाव में दो साल पहले बंद किया गया और कोरोनाकाल में यहां चलने वाली एकमात्र पैसेंजर रेल बंद पड़ी है। लोगों को आस थी कि कोरोना खत्म होने पर फिर चलेगी लेकिन एक-एक कर रेलवे इस मार्ग के रेलवे स्टेशन बंद करने और कार्मिकों को हटाने में लगा है। ऐसे में लोगों को 120 साल पुराने पश्चिमी सीमा के इस गौरवपथ पर रेलें बंद होने की आशंका सताने लगी है। सरहदी लोगों का कहना है कि वे सीमा पर सैनिकों की भूमिका में रहते है उनकी यह रेल वापिस तुरंत पटरी पर लौटनी चाहिए।
120 साल पहले बिछी पटरी
बाड़मेर से गडरारोड़- मुनाबाव तक अंग्रेजों के समय रेलवे लाइन बिछी थी। मीटर गेज की यह लाइन 120 साल पहले सन 1902 में बिछी, जो पाकिस्तान के सिंध को भारत से जोड़ती थी। भारत पाक का बंटवारा 1947 में हुआ तो यहां दौडऩे वाली रेल से ही हजारों लोगों ने भारत-पाकिस्तान का सफर तया किया।
1965 में बंद हुआ मार्ग
1965 का भारत पाक युद्ध हुआ तो पाकिस्तान ने इस मार्ग पर हमला बोल दिया ताकि भारतीय सैनिकों तक राशन सामग्री नहीं पहुंचे लेकिन 9 सितंबर 1965 को बमबारी के बीच ही रेलवे के कार्मिक सैनिकों के लिए राशन सामग्री लेकर रवाना हो गए। बीच रास्ते 17 सैनिक शहीद हो गए लेकिन ाशेष रहे लोगों रेल नहीं रोकी और राशन सामग्री सेना तक पहुंचाई। रेलवे ने इनको शहीद का दर्जा दिया और हर साल यहां शहीद मेला लगता है। इस बमबारी के बाद मार्ग बंद हो गया था।
2006 में खुला तो रिश्तों की डोर बना
फरवरी 2006 में भारत और पाकिस्तान के बीच में थार एक्सप्रेस का संचालन शुरू हुआ तो इस मीटरगेज लाइन को ब्राडगेज में बदला गया। इस मार्ग से भारत-पाक के बीच बसे लाखों लोगों का आना जाना 2006 से 2018 तक लगातार हुआ। रिश्तों की डोर बनी इस रेल ने दोनों मुल्कों के 1947 में बंटे परिवारों को फिर मिलाया।
2018 में बंद हुई थार
पुलवामा हमला और एयर स्ट्राइक के बाद 2018 में थार एक्सप्रेस को बंद कर दिया गया। थार एक्सप्रेस बंद होने के बाद इस मार्ग के रास्ते पाकिस्तान की तरफ तो बंद हो गए लेकिन भारत की ओर साधारण रेल अनवरत चलती रहने से यह आस रही कि फिर से पाक की रेल भी कभी न कभी चलेगी।
कोविड-19 ने बंद कर दी साधारण रेल
मार्च माह में कोरोना शुरू हुआ तो देश में रेलों का संचालन बंद कर दिया गया। इस दौरान यह साधारण रेल भी बंद कर दी गई। इसके बाद इसका संचालन शुरू नहीं हुआ। सरहदी क्षेत्र के लोगों ने तर्क भी दिया कि इस रेल में ज्यादा सवारियां नहीं होती और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना से रेल संचालन किया जा सकता है लेकिन इस पर सुनवाई नहीं हुई।
अब तो रेल को तरस न जाए लोग
थार एक्सप्रेस के संचालन के दौरान खड़ीन, तामलौर, लीलमा स्टेशन को बंद कर दिया गया। अब लॉकडाउन के दौरान जसाई, भाचभर, मुनबाव से स्टेशन मास्टर को हटा दिया गया है। रेलवे का तर्क है कि जब रेल ही नहीं चल रही है तो स्टेशन मास्टर यहां क्या करेंगे?
रेल संचालन अभी बंद है
कोविड-19 के चलते सभी जगह रेल संचालन बन्द हैं। इसलिए स्टाफ को भी यहां से हटाया गया है।
- गोपाल शर्मा
पीआरओ, मण्डल रेल प्रबंधक कार्यालय जोधपुर
Published on:
29 Nov 2020 06:33 pm
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