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16 जिलों में 25 राज्यमार्ग शहरी मार्गों में विलोपित

खुल सकेंगी शराब की दुकानें :- आबकारी विभाग के पत्राचार पर हुई कार्रवाई, सार्वजनिक निर्माण विभाग ने जारी किए आदेश, सर्वोच्च न्यायालय ने शराब दुकानें हाइवे से 500 मीटर दूर लगाने के दिए थे आदेश

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तुम डाल-डाल, मैं पात-पात। यह कहावत आबकारी विभाग पर सटीक बैठ रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने शराब की दुकानों को राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी पर लगाने का आदेश दिया तो आबकारी विभाग ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से पत्राचार कर शहरी क्षेत्र के राजमार्गों का दर्जा ही समाप्त करवा दिया। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने प्रदेश में 25 राजमार्गों का दर्जा खत्म कर शहरी मार्ग घोषित किए हैं। इसमें बालोतरा शहर में राज्य राजमार्ग-28ए का 6 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है। इस पर अब दर्जन भर शराब दुकानों का संचालन हो सकेगा।

सर्वाेच्च न्यायालय के राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों के किनारों से 500 मीटर में शराब दुकानें नहीं लगाने के आदेशों के बाद आबकारी विभाग ने शहरी क्षेत्रों से गुजर रहे राज्य राजमार्गों का दर्जा खत्म करवाने के लिए शहरों के बाहरी भाग में बने बायपास मार्गों की दलील देते हुए करीब दो माह पूर्व सार्वजनिक निर्माण विभाग को प्रस्ताव भिजवाए थे। इस पर बुधवार को सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता शिव लहरी शर्मा ने आदेश जारी कर 16 जिलों में 25 राज्य राजमार्गों के 132 किलोमीटर हिस्से का दर्जा खत्म कर शहरी मार्ग घोषित किया है। इससे अब शहरी क्षेत्रों के प्रमुख मार्गों पर शराब दुकानें चल सकेगी।

इन जिलों में दर्जा हुआ खत्म

आदेश में जयपुर, अजमेर, अलवर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, सीकर, दौसा, सवाई माधोपुर, कोटा, झुंझुनूं, बूंदी व भरतपुर जिलों में 25 राज्य राजमार्गों का शहरी मार्गों में विलोपित किया है।

यह था आदेश

सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों से 500 मीटर दूर तक शराब की दुकानें नहीं लगाने के आदेश दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जिनके पास लाइसेंस है, वह खत्म होने या 31 मार्च 2017 तक जो पहले हो, तक इस तरह की दुकानें चल सकेंगी। इससे स्पष्ट हो गया था कि 1 अप्रेल 2017 से हाईवे पर इस तरह की दुकानें नहीं संचालित नहीं होगी। सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में यह फैसला हो गया। इसके साथ ही राजमार्गों के किनारे लगे शराब के विज्ञापन और साइन बोर्ड हटा दिए जाएंगे। कोर्ट ने राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेशों की पालना करवाने की जिम्मेदारी दी।


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