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नल पर मीटर लगे ना रीडिंग ली, किराया जोड़ भेज दिए पानी के बिल

- पहली बार बिल के साथ जुड़कर आया मीटर किराया-विभाग ने कभी नहीं ली पानी के मीटर की रीडिंग-सरकार का नियम बताकर भेज दिए बिल  

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Without reading bill in Water department

Without reading bill in Water department

बाड़मेर. शहर में पानी के बूंद-बूद का हिसाब व व्यर्थ पानी खर्च रोकने को उपभोक्ताओं के लिए विभाग की ओर से लागू की गई पानी के मीटर की योजना बाड़मेर में कागजी साबित हो रही है। यहां विभाग के आदेश पर उपभोक्ताओं ने मीटर तो खरीद लिए, लेकिन उनके पठन व निगरानी को लेकर जलदाय विभाग ने कभी ध्यान नहीं दिया। अब उपभोक्ता के घर पर मीटर नजर नहीं आ रहा और ना ही विभाग के कर्मचारी मीटर की रीडिंग लेने कभी गए। ऐसे में पानी खर्च करने वाले व नहीं करने वाले एक सम्मान बिल का भुगतान चुकाएंगे। सरकारी नियम बताते हुए विभाग ने अप्रेल माह से मीटर का किराया जोड़कर बिल भेज दिया है। चार महीने के बिल में मीटर का किराया जुड़कर आने से उपभोक्ता परेशान हैं।
विभागीय नियमों के तहत उपभोक्ता को 15 हजार लीटर जलापूर्ति का निशुल्क प्रावधान है। लेकिन जलदाय विभाग की अनदेखी व मीटर रीडिंग व प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं होने पर किसी भी उपभोक्ता को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जिस उपभोक्ता के यहां सप्ताह में एक बार सप्लाई पहुंचती है, उसका भी बिल इतना ही आता है जिसके यहां एक दिन छोड़ एक दिन सप्लाई पहुंचती है। शहर में आबादी के अनुसार प्रतिदिन 20 लाख लीटर की खपत है। जबकि विभाग महज 10 लाख लीटर की बमुश्किल सप्लाई पहुंचा पा रहा है।

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40 हजार लीटर का उपयोग मानता है विभाग
शहर में किसी भी उपभोक्ता के मीटर रीडिंग अनुसार बिल जारी नहीं होता है। जबकि कनेक्शन के समय विभाग उपभोक्ता से मीटर मंगवाता है। लेकिन अधिकांश मामलों में मीटर की खानापूर्ति की जाती है। जहां मीटर लगा भी दिए हैं तो रीडिंग कभी नहीं ली जाती है। इसलिए सभी घरेलू उपभोक्ताओं से 80 हजार लीटर औसत पानी का उपभोग मानकर वसूली की जा रही है। लेकिन विभाग यह ध्यान ही नहीं दे रहा है कि कहां पेयजल की आपूर्ति होती है? और कहां नहीं होती है? सभी उपभोक्ताओं को एक समान मानकर वसूली कर रहा है।
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फैक्ट फाइल
वार्ड- 40
जनसंख्या - 1 लाख 50 हजार
जोन - 20
उपजोन - 125
प्रतिदिन पानी की खपत - 20 लाख लीटर
उपभोक्ता - 27 हजार 426
जल मीटर - 22 हजार 187
औसत राजस्व प्राप्ति प्रतिमाह - 50-60 लाख
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अप्रेल से किया है लागू
पानी बिल के साथ पहली बार मीटर शुल्क जोड़ा गया है। यह सरकार की गाइडलाइन अनुसार है। बाड़मेर में इसे अप्रेल से लागू किया गया है। ऑफिस के कर्मचारी मीटर रीडिंग लाते हैं।- हेमंत कुमार चौधरी, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग